‘इस बार सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को पता चलेगा कि सीमांचल की जनता में कितना आक्रोश है’

ऐसी झूठी अफवाहों की परवाह नहीं. सीमांचल की जनता जानती है कि हम क्या हैं और सांप्रदायिकता के खिलाफ हमने क्या लड़ाई लड़ी है. और जहां तक राजद-जदयू के महागठबंधन की ओर से आरोप लगाने का सवाल है तो जदयू 17 साल तक भाजपा के साथ ही रही है, उसे तो भाजपा के खिलाफ बोलने का हक तक नहीं.

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क्या सीमांचल में आप अपनी पार्टी से सिर्फ मुसलमानों को ही टिकट देंगे या दूसरे समुदाय के लोगों को भी पार्टी का उम्मीदवार बनाएंगे?

ये हिंदू-मुसलमान का देश नहीं है. जो हिंदुस्तानी हैं, हम उनके साथ होंगे, वे हमारे साथ. हमारी पार्टी ने महाराष्ट्र में दलितों को टिकट दिया. औरंगाबाद में म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के चुनाव में 29 में पांच दलित हैं और वे सभी हमारी पार्टी से हैं. हम संप्रदाय और जाति के आधार पर राजनीति नहीं करेंगे. हम सिर्फ जीतने के लिए चुनाव नहीं लड़ रहे. हमारे लड़ने से सीमांचल में इस बार सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को पता चलेगा कि यहां की जनता में कितना आक्रोश है. सीमांचल की जनता दूध का दूध और पानी का पानी करेगी.

लेकिन एक बात तो तय है कि आपकी पार्टी चुनाव लड़ेगी तो वोटों का बंटवारा होगा और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर होंगी. आप क्या सोचते हो?

याद रखिए, देखते रहिएगा. हम धर्मनिरपेक्ष को ही मजबूत करेंगे और तरक्की पसंद वोटों को बिखरने नहीं देंगे.

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