मैंने मां की आंखें दान की थीं लेकिन लिस्ट में हमारा नाम नहीं

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‘हमारे भांजे को एनीमिया हुआ था. उसे हर हफ्ते-दस दिन में खून की जरूरत पड़ती थी. उस समय ऐसे-ऐसे लोगों ने हमें खून दान में दिया था जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. बस उसी समय माताजी ने मन बना लिया था कि उन्हें भी ऐसा कुछ करना है जिससे किसी के जीवन में खुशहाली आ सके. यही सोचकर उन्होंने मौत के बाद अपनी आंखें दान करने का फैसला लिया था.’

अपनी मां को याद करते हुए राहुल गुप्ता और अंकित गुप्ता थोड़ा भावुक हो उठते हैं. राहुत बताते हैं, ‘हमारी मां राधा गुप्ता का निधन एक जनवरी 2014 को हुआ था. उनकी अंतिम इच्छा आंखें दान करने की थी, इसलिए हमने जयारोग्य अस्पताल से संपर्क किया था. इसके बाद अस्पताल की एक गाड़ी से कुछ लोग आए थे मां की आंखें लेने. उस वक्त उन्होंने हमसे एक शपथ पत्र भी भरवाया था.’

शपथ पत्र दिखाते हुए वह कहते हैं, ‘दुख का समय ऐसा होता है जब हम कानूनी औपचारिकताओं की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं. शपथ पत्र पर न कोई सील है न सिक्का. आई बैंक के दानदाताओं के रजिस्टर में हमारी मां का नाम भी नहीं है. अस्पताल में पूछने पर वहां का स्टाफ कहता है कि आपके परिवार से तो आंखें दान ही नहीं की गई हैं. हमारे पास शपथ पत्र के अलावा कुछ भी नहीं है, अब कैसे साबित करूं की मेरी मां की मौत के बाद मैंने उनकी आंखे जयारोग्य अस्पताल के नेत्र विभाग को दान में दी थीं?’  अंकित बताते हैं, ‘मेरी मां की उम्र पचास वर्ष थी. आंखें निकालते वक्त डॉक्टर बोल भी रहे थे कि आंखें ठीक हैं, किसी को लग सकती हैं, इसीलिए हमने कोई जानकारी नहीं जुटाई कि आंखें किसी को लगीं या किसी दूसरे काम में ले ली गईं? अब पता चल रहा है कि अस्पताल में दान की गईं आंखे कचरे में फेंक दी गई थीं तो सदमा लगा. अगर अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोगों को आंखें फेंकनी ही थीं तो निकाली ही क्यों? उन्हें आंखें दान में ही नहीं लेनी चाहिए थीं. इससे अच्छा तो ये होता कि वे आंखें हमें वापस ही दे देते, हम गंगा में विसर्जित कर देते.’ राहुल कहते हैं, ‘अब तक आंखें दान करने के बारे में सोचकर बहुत अच्छा लगता था. सोचते थे कि मां की आंखें दान करके पुण्य का काम किया है, लेकिन इस तरह की घटनाओं से आगे कोई कैसे अपने परिजन की आंखें दान करने की हिम्मत जुटा पाएगा. शहर के सबसे बड़े और नामी अस्पताल और वहां के डॉक्टरों पर विश्वास किया और बदले में क्या हुआ? इस मामले की अच्छी तरह से जांच कर सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए. साथ ही इस निंदनीय घटना को अंजाम देने वाले जिम्मेदारों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए.’