वादे हैं वादों का क्या

एक सभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी; फोटो: शैलेंद्र पांडेय
एक सभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी; फोटो: शैलेंद्र पांडेय
एक सभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी; फोटो: शैलेंद्र पांडेय
एक सभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी; फोटो: शैलेंद्र पांडेय

जब नगीचे चुनाव पास आवत है, भात मांगो तो पोलाव आवत है. अवधी कवि रफीक सादानी के ये शब्द गांधी परिवार के निर्वाचन क्षेत्र  अमेठी व रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के लोगों पर सटीक बैठते हैं. चुनाव करीब आते ही दोनों वीवीआइपी लोकसभा क्षेत्रों के लिए करोड़ों रु की योजनाओं की झड़ी लगा दी गई है. हालांकि कांग्रेस ने ऐसा कोई पहली बार नहीं किया है. 2009 के लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए 2007 से ही पार्टी ने अमेठी और रायबरेली के लिए योजनाओं का अंबार लगाना शुरू कर दिया था. लेकिन सारी योजनाएं 2009 के चुनाव तक ठंडे बस्ते में ही रहीं. कांग्रेस ने यह कहते हुए इसका सियासी फायदा उठाने का प्रयास किया था कि राज्य की तत्कालीन बसपा सरकार योजनाओं के लिए जमीन ही नहीं दे रही है. लेकिन इस बार स्थितियां अलग हैं. कांग्रेस जैसे-जैसे अमेठी व रायबरेली के लिए योजनाओं की घोषणा कर रही है राज्य सरकार उसे जमीन व अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराती जा रही है. लिहाजा 2014 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से कांग्रेस को राज्य सरकार पर आरोप लगाने का मौका ही नहीं मिल पा रहा.

गांधी परिवार 2014 के लिए रायबरेली व अमेठी को लेकर 2009 के मुकाबले अधिक गंभीर है. कारण 2012 का विधानसभा चुनाव है जिसमें कांग्रेस का गढ़ समझे जाने वाले इस इलाके की 10 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस के हिस्से में महज दो सीटें आईं. इस करारी हार के बाद लोकसभा चुनाव में भी कोई गड़बड़ न हो इसे ध्यान में रखते हुए गांधी परिवार ने अमेठी व रायबरेली के अपने किले को बचाए रखने के लिए एक बार फिर लोकलुभावन विकासरूपी चुनावी वादों का सहारा लिया है.

सबसे पहले बात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली की. यहां हाल ही में देश का पहला महिला केंद्रीय विश्वविद्यालय और उड्डयन विश्वविद्यालय खोले जाने की घोषणा की गई है. इसके अतिरिक्त सोनिया गांधी ने एक एफएम रेडियो स्टेशन, किलाबाजार में बालिका इंटर कॉलेज का शिलान्यास और एक डाकघर का उद्घाटन किया है. एक फूड मार्ट और एम्स की घोषणा भी हो चुकी है. एम्स के लिए प्रदेश सरकार की ओर से जमीन भी उपलब्ध करा दी गई है. नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने राजधानी लखनऊ से रायबरेली तक फोरलेन रोड के लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना भी हाल में जारी की है.

इन योजनाओं के अतिरिक्त लोकसभा चुनाव में रायबरेली लोकसभा के कील-कांटे दुरुस्त करने का जिम्मा प्रियंका गांधी ने खुद संभाला है. पिछले तीन-चार महीने में प्रियंका खुद आधा दर्जन से अधिक बार रायबरेली का दौरा कर चुकी हैं. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद उन्होंने रायबरेली में पार्टी संगठन को कसने की कोशिश की है. वे लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हर एक ब्लॉक के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके रणनीति बना रही हैं. संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए पार्टी की ओर से ब्लॉक अध्यक्षों को 100 सीसी की बाइक तक दी गई है ताकि वे दौड़-धूप करके संगठन मजबूत कर सकें. प्रियंका महीने में एक बार रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से जुड़े संगठन के लोगों की बैठक दिल्ली में भी कर रही हैं.

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