इस टूथपेस्ट में नमक नहीं…सलमान खान हैं

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1977
kick
िफल्म » किक
निर्देशक» साजिद नाडियाडवाला
लेखक » रजत अरोड़ा, साजिद, चेतन भगत
कलाकार » सलमान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, जैकलीन फर्नांडिस, रणदीप हुड्डा

बात पहले टूथपेस्ट की. फिर सलमान की.

टूथपेस्ट के इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले दैदीप्यमान ज्ञानियों के अनुसार टूथपेस्ट के तकरीबन सात हजार साल पुराना होने के प्रमाण उनके पास हैं. इतना पुराना पेस्ट नहीं है, पर उसका वेस्ट और टेस्ट कहीं न कहीं है. निकट के वर्षों में जबसे बाजार ने ‘एक जार में एक आम’ बेचने का चलन विदेशों में शुरू किया था, टूथपेस्ट ने अनेकों रूपों में प्रकट होना शुरू कर दिया. उसे जगत में बिकना सिर्फ एक वजह से था –साफ करने वाला दातून जो कड़वा नहीं है- लेकिन इत्ते से काम के लिए टूथपेस्ट के सैकड़ों नाम, सैकड़ों रंग, सैकड़ों स्वाद, मुंह के अलग-अलग हिस्सों में प्रहार करने की अलग-अलग दैवीय क्षमताओं के साथ बाजार में चले आए. इनका लंगोटिया यार बना दांतों के साथ चमत्कार करनेवाला विज्ञापन अभियान, जिसे नफासत से दशकों से चलाते रहने के लिए इसे बनाने और बेचनेवाले एडवरटाइजिंग के नटवरलालों को  मानवता का नमन.

सलमान खान की फिल्में यही टूथपेस्ट हैं. दशकों से उनके सैकड़ों नाम, रंग, स्वाद हैं और उतने ही दावे-वादे भी. लेकिन अंत में वे बेचती सिर्फ एक चीज हैं. सलमान खान. और चूंकि टूथपेस्ट की समीक्षाएं हमारे समाज में होती नहीं हैं, जोमेटो पर भी नहीं, सलमान खान की फिल्मों की भी समीक्षाएं नहीं होनी चाहिए.

लेकिन…

जब आपने पुरानी कमीज पर नयी चमकदार इस्त्री कर उसे नया-महंगा बता दर्शकों को पहनने के लिए दे ही दिया है, ऐसी कमीज को उतारने का काम तो करना पडेगा ही.

जब कुछ लोग पीछे की खाली पड़ी सीटों पर जाकर बैठने के लिए इंटरवल होने का इंतजार कर रहे थे, ‘किक’ इंटरवल से पहले वाले हिस्से में बादवाले हिस्से की भूमिका बनाने में अपनी जगह खर्च कर रही थी. वही दूसरा हिस्सा, जिसके प्रोमो से लोगों को प्रेम हुआ था क्योंकि उसमें सलमान मास्क लगाकर आनेवाले थे और मानवता के हर दुख को हरने वाले थे. इसलिए पहले भाग के दौरान लोगों ने कंधे ढीले छोड़ दिए और वे सलमान, मिथुन, संजय मिश्रा के जेल वाले दृश्य पर और नृत्य पर खूब हंसे, जैकलीन के पूरी फिल्म में एक ही एक्सप्रेशन कैरी करने को नजरअंदाज कर गए, रणदीप हुड्डा के साधारणतम होने पर उन्हें कोसना भूल गए, सलमान के आईआईटी-आईआईएम टाइप बुद्धि होने के साथ सड़कछाप आशिकी का शौकीन होने पर सीटी मारते रहे, और बेवजह आने वाले गानों पर गपागप नाचोज खाते रहे.

लेकिन दूसरे हिस्से में जब किक-मैन सलमान मास्क लगा पोलैंड में ‘जुम्मे की रात’ गाते हुए एक्शन का बंदोबस्त करने निकलते हैं, फिल्म जय हो के नेकदिल नायक की तरफ लौट जाती है, और उसमें बीइंग ह्यूमन को मिला देती है. इस घालमेल से तालमेल मिलाने की कोशिश कर रहे सलमान दर्शकों को बेतुकी कहानी में बेवजह की हीरोगीरी-सुपरहीरोगीरी दिखा तिलमिला देते हैं, और दर्शक पछताता है कि क्या हो सकती थी फिल्म और क्या हो गई फिल्म. ऐसे में नवाजुद्दीन आनंद देते हैं. हालांकि उनके पास दृश्य बेहद कम हैं लेकिन जोकर प्रभावित उनका किरदार जब देसी-जोकरी करता है, फिल्म का नायक वही बनता है.

किक की यही खासियत है. वह टूथपेस्ट के साथ एक छोटा टूथब्रश फ्री देती है, जो मुख्यधारा के सिनेमा की सफाई अच्छी करता है. यानी नवाज. सलमान की फिल्म में नवाज कहर ढा रहे हैं, इसी में किक है, सिनेमा की उम्मीद है.

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