इस टूथपेस्ट में नमक नहीं…सलमान खान हैं

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जब आपने पुरानी कमीज पर नयी चमकदार इस्त्री कर उसे नया-महंगा बता दर्शकों को पहनने के लिए दे ही दिया है, ऐसी कमीज को उतारने का काम तो करना पडेगा ही.

जब कुछ लोग पीछे की खाली पड़ी सीटों पर जाकर बैठने के लिए इंटरवल होने का इंतजार कर रहे थे, ‘किक’ इंटरवल से पहले वाले हिस्से में बादवाले हिस्से की भूमिका बनाने में अपनी जगह खर्च कर रही थी. वही दूसरा हिस्सा, जिसके प्रोमो से लोगों को प्रेम हुआ था क्योंकि उसमें सलमान मास्क लगाकर आनेवाले थे और मानवता के हर दुख को हरने वाले थे. इसलिए पहले भाग के दौरान लोगों ने कंधे ढीले छोड़ दिए और वे सलमान, मिथुन, संजय मिश्रा के जेल वाले दृश्य पर और नृत्य पर खूब हंसे, जैकलीन के पूरी फिल्म में एक ही एक्सप्रेशन कैरी करने को नजरअंदाज कर गए, रणदीप हुड्डा के साधारणतम होने पर उन्हें कोसना भूल गए, सलमान के आईआईटी-आईआईएम टाइप बुद्धि होने के साथ सड़कछाप आशिकी का शौकीन होने पर सीटी मारते रहे, और बेवजह आने वाले गानों पर गपागप नाचोज खाते रहे.

लेकिन दूसरे हिस्से में जब किक-मैन सलमान मास्क लगा पोलैंड में ‘जुम्मे की रात’ गाते हुए एक्शन का बंदोबस्त करने निकलते हैं, फिल्म जय हो के नेकदिल नायक की तरफ लौट जाती है, और उसमें बीइंग ह्यूमन को मिला देती है. इस घालमेल से तालमेल मिलाने की कोशिश कर रहे सलमान दर्शकों को बेतुकी कहानी में बेवजह की हीरोगीरी-सुपरहीरोगीरी दिखा तिलमिला देते हैं, और दर्शक पछताता है कि क्या हो सकती थी फिल्म और क्या हो गई फिल्म. ऐसे में नवाजुद्दीन आनंद देते हैं. हालांकि उनके पास दृश्य बेहद कम हैं लेकिन जोकर प्रभावित उनका किरदार जब देसी-जोकरी करता है, फिल्म का नायक वही बनता है.

किक की यही खासियत है. वह टूथपेस्ट के साथ एक छोटा टूथब्रश फ्री देती है, जो मुख्यधारा के सिनेमा की सफाई अच्छी करता है. यानी नवाज. सलमान की फिल्म में नवाज कहर ढा रहे हैं, इसी में किक है, सिनेमा की उम्मीद है.

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