कोस्टारिका

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विश्व रैंकिंग: 28
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन : आखिरी 16 टीमों में प्रवेश (1990)

खास बात
टीम के गोलकीपर केलर नवास को इस टूर्नामेंट में उनकी प्रतिभा के मुकाबले काफी कम करके आंका जा रहा है. यूरोप में खेलते हुए उन्होंने कई दिग्गजों को अपने नेट के सामने से निराश लौटाया है

इंग्लैंड, इटली और उरुग्वे के साथ एक ही ग्रुप में मौजूद जॉर्ज पिंटो (कोच) की कोस्टारिका इन सबसे कमतर जरूर दिखती है लेकिन छुपी रुस्तम जैसी टीमें इन्हें ही कहा जाता है. मैचों के पहले उन्हें कम करके आंका जा रहा है जो उनके लिए फायदेमंद है. कोस्टारिका  की सबसे बड़ी खूबी उसका डिफेंस है. पांच बैकलाइन खिलाड़ी और तीन सेंटर डिफेंडर उसकी बड़ी ताकत हैं. इसके बाद कैलर नवास के रूप में इस टीम के पास एक बेहतरीन गोल कीपर भी है. अपने दस क्वालीफाइंग मुकाबलों में कोस्टारिका के विरुद्ध टीमें कुल सात गोल ही कर पाई थीं. हालांकि पिंटों को अब एहसास है कि विश्व कप में आगे बढ़ना है तो उन्हें फॉरवर्ड या आक्रमण को धार देनी होगी. इसके लिए उनके पास ब्रायन रुइज हैं और उनकी मदद के लिए क्रिस्चियन बोलानोज और स्ट्राइकर जोइल कैंपबेल भी हैं.

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