शख़्सियत Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
साइमन उरांव : जल, जंगल और जमीन का सर्जक

गणतंत्र दिवस के ठीक पहले की बात है. हर बार की तरह इस बार भी रस्मअदायगी अंदाज में पद्म सम्मानों को लेकर घमासानी वाकयुद्ध छिड़ा हुआ था. फलाना को क्यों मिला, फलाना पर नजर क्यों नहीं गई, फलाना तो सेटिंग-गेटिंग कर पद्म सम्मान लेने में सफल रहे. ऐसी ही बातें  

‘किसी महिला के लिए अपने मन की बात रखना आसान नहीं होता’

महिला हों या पुरुष, आपके बारे में सब यह बात जरूर मानते हैं कि आप बेहद खूबसूरत हैं. क्या आपको लगता है कि खूबसूरती ही आपकी सबसे बड़ी खूबी है? खूबसूरती आपके आत्मविश्वास में होती है या कह सकते हैं आप जैसे बात करते हैं, उठते बैठते हैं, वह खूबसूरती  

‘मल्टीप्लेक्स पॉपकॉर्न बेचने के लिए खोले गए हैं, उनके लिए बाजीराव मस्तानी या चौरंगा कोई मतलब नहीं रखता’

फिल्म को  ‘चौरंगा’  नाम क्यों दिया? इसका अर्थ क्या है? इसकी दो वजहें हैं. एक तो चौरंगा का मतलब ही होता है चार रंग. दूसरा फिल्म एक तरह से हमारी वर्ण व्यवस्था से जुड़ी हुई है. हिंदू वर्ण व्यवस्था के अनुसार समाज को चार जातियों में बांटा गया है- ब्राह्मण,  

तितली उभरते भारत पर टिप्पणी

दिल्ली के पटपड़गंज पश्चिम इलाके में बना ये घर विभिन्न कलाओं का केंद्र कहा जा सकता है. ये घर बहल परिवार का है. बहल परिवार यानी मां नवनिंद्र बहल, पिता ललित बहल और बेटे कनु बहल. नवनिंद्र बहल पंजाबी साहित्य की पढ़ाई के बाद पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के नाटक  

‘डोंगी से यात्रा में बार-बार महसूस हुआ कि आगे बढ़ना मुश्किल है’

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक राकेश तिवारी की मूल प्रकृति में घुमक्कड़ी का वास बहुत छोटी उम्र में ही हो गया था. पिता भी उन्हें घूमने को उकसाते. घूमने का शौक ऐसा चढ़ा कि 21 साल की उम्र में साइकिल उठाई और लखनऊ से काठमांडू निकल गए. घुमक्कड़ी के साथ-साथ लिखने का भी शौक जारी रहा. यात्रा वृतांत के तौर पर उनकी पहली किताब ‘पहियों के इर्द-गिर्द’ प्रकाशित हुई. इस यात्रा के दो साल बाद ही उन्होंने डोंगी (नौका)...  

‘मुझे उस छोटे से शहर से प्यार है, जहां से मैं हूं’

कंगना, आपने परिवार के खिलाफ जाकर फिल्मों की तरफ रुख किया था. अब जबकि आप राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बन चुकी हैं तो परिवार की क्या प्रतिक्रिया है? पापा बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा है कि यह मेरे जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा है. मेरा जन्म 23 मार्च को हुआ था  

‘एक आदमी जिससे मैं सिर्फ दो बार मिली और अब इस मोड़ पर खड़ी हूं’

आप पाकिस्तान पर एक किताब लिख रही हैं. यह साधारण पाकिस्तानी लोगों की कहानी है, जो समाज में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं. यह विचार दिमाग में कैसे आया? दरअसल, यह विचार मेरे प्रकाशक की ओर से आया. भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ मलाला  

अइसी कविता ते कौनु लाभ!

2015  अवधी भाषा के महत्वपूर्ण कवि-नाटककार चन्द्रभूषण त्रिवेदी उर्फ रमई काका का जन्मशताब्दी वर्ष है. पढ़ीस और वंशीधर शुक्ल के साथ रमई काका अवधी की उस अमर ‘त्रयी’ का हिस्सा हैं जिसकी रचनात्मकता ने तुलसी और जायसी की अवधी को एक नई साहित्यिक समृद्धि प्रदान की. यूं अवधी की इस  

‘जीवन की जटिलता का प्रतीक है छंदमुक्त कविता’

अष्टभुजा शुक्ल समकालीन हिंदी कविता में ग्राम्य चेतना, कृषक जीवन, लोकजीवन के कुशल चितेरे कवि हैं. अंकित अमलतास की उनसे बातचीत के अंश  

दिलदार और दुनियादार एक सरदार

खुशवंत सिंह में स्वयं का उपहास उड़ाने और खुद को बेनकाब करने का अद्भुत साहस था