राज्यवार Archives | Page 2 of 13 | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
देखते हैं किस करवट बैठता है बुंदेलखंड में ऊंट

उत्तर प्रदेश में नगर निकाय के चुनाव को लेकर पूरा प्रदेश चुनावी रंग में रंगा हुआ है। लेकिन यह रंग और भी गाढ़ा तब हो गया जब उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुन्देलखण्ड में 22 अक्टूबर को महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने करोड़ों रु पये की  

अचंभा नहीं, यदि गुजरात के नतीजे चौंकाएं

गुजरात में यानी बाइस साल बाद जबरदस्त मुकाबला है। विधानसभा की एक-एक सीट पर क्या नतीजे आएंगे उन पर हर कहीं सिर्फ बहस हो रही है। अजेय मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी इस बार वहां मैदान में नहीं हैं। लेकिन इस साल के हर महीने और पिछले महीने भी उन्होंने प्रदेश  

‘राजनीतिक तौर पर मुझे खत्म करने की साजिश’

हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह न केवल छह बार मुख्यमंत्री रहें हैं और सातवीं बार के लिए फिर मैदान में हैं। उन्हें बहुत चतुराई से योजना बनाने वाला और पार्टी के भीतर और बाहर की चुनौतियों को ध्वस्त करने की क्षमता वाला नेता माना जाता है। पार्टी उपाध्यक्ष राहुल  

‘कांग्रेस ने योजना तक तो बनाई नहीं, विकास कहां किया’

प्रेम कुमार धूमल को हिमाचल में भाजपा का सबसे कद्दावर नेता माना जाता है। दो बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं और इस बार भी भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी हैं। यह माना जाता है कि 1998 में जब  

मुंबई के परेल पुल पर हुआ हादसा छाई रही राजनीति?

मुंबई के लोगों को लोकल ट्रेन पर जितना भरोसा रहा है, उतना शायद ही किसी व्यवस्था पर। लेकिन पिछली 29 सितंबर को अचानक यह भरोसा हट गया जब 23 लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ी और 30 बुरी तरह जख्मी हो गए। एलफिंस्टन रोड़ और परेल को जोडऩे वाले संकरे उडऩ  

हिमाचल में चुनाव की रणभेरी

पहाड़ी सूबे हिमाचल में भले ठण्ड पडऩे लगी हो, चुनाव की गर्मी बढऩे लगी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त अचल कुमार ज्योति के हिमाचल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही विधानसभा की 68 सीटों के लिए जंग शुरू हो गयी है। मतदान 9 नवम्बर को होगा हालांकि नतीजे के लिए करीब एक  

गुटबाजी से कांग्रेस पस्त, भाजपा मस्त

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार को घेरने की कांग्रेस की कोशिश लगातार धराशाई हो रही है. राज्य में पार्टी गुटबाजी का शिकार होकर राह भटक चुकी है  

सवर्ण राजनेता: सप्तमो अध्याय समाप्ते !

बिहार में सवर्णों को अपने पाले में करने के लिए सवर्ण आयोग बनाने से लेकर सवर्णों तक को आरक्षण देने की राजनीति रोज हो रही है लेकिन शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि वर्तमान सरकार के मंत्रिमंडल के जरिये सत्ता की सियासत से ब्राह्मणों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है. तो क्या चाणक्य की कर्मभूमि में ब्राह्मणों की राजनीति का यह 'इतिश्री रेवाखंडे, सप्तमो अध्याय समाप्ते' वाला दौर है  

जोन बड़ी है जहमत

उत्तराखंड में बन रहा नया ईको सेंसटिव जोन तमाम अच्छी-बुरी वजहों से चर्चा में है. लंबे समय बाद सत्ताधारी कांग्रेस व विपक्षी दल भाजपा किसी बात पर एकजुट हुए हैं और वह है इस जोन का विरोध