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लौटने लगे हैं लोग मेरे गांव के…

उत्तर प्रदेश के कानपुर की अनिता मिश्रा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की और ‘गृहलक्ष्मी’ पत्रिका से जुड़ गईं. अचानक एक दिन घर से फोन आया कि उनके पिताजी पक्षाघात के शिकार हो गए. वे अपने पिता की सेवा-सुश्रूषा के लिए कानपुर चली गईं.  

‘स्वच्छ भारत’ का सच

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत की, जिसकी घोषणा उन्होंने 68वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले के अपने उद्बोधन में की थी. मोदी ने कहा था, ‘गरीबों को सम्मान मिलना चाहिए और मैं चाहता हूं कि इसकी शुरुआत सफाई से हो.  

अकेले नहीं आते बाढ़ और अकाल

इन दिनों मेघालय, असम से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात में आई बाढ़ और उससे हुई जानमाल की भारी क्षति ने विकास के नए मॉडल पर एक बार फिर से सवाल खड़ा किया है. वहीं दूसरी ओर इस साल कम बारिश होने की आशंका भी जताई गई है. कहीं बाढ़ कहीं सुखाड़, हर दिन के किस्से हो गए हैं. समाज कैसे इन चुनौतियों से निपट सकता है, इसका समाधान इस लेख में मिल सकता है. ‘गांधी मार्ग’ से साभार  

अकेले नहीं आते बाढ़ और अकाल

देश का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज खुला था हरिद्वार के पास रुड़की नामक एक छोटे से गांव में. और सन था 1847. तब ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था. ब्रितानी सरकार भी नहीं आई थी. कंपनी का घोषित लक्ष्य देश में व्यापार था. प्रशासन या लोक कल्याण नहीं. व्यापार भी शिष्ट  

निजता पर नजर

अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी की एक निगरानी परियोजना की तर्ज पर सरकार देश में सेंट्रल मॉनीटरिंग सिस्टम लागू करने वाली है. इससे हर शख्स पर सरकार की नजर रहेगी. इस कवायद का मतलब ये है कि सरकार आपके फोन कॉल सुनने, मैसेज और ईमेल पढ़ने के अलावा आपका पासवर्ड भी जान सकती है  

तल में  लोकदल

सजायाफ्ता शीर्ष नेतृत्व और लगातार मिल रही चुनावी मात के बाद हरियाणा की राजनीति में इंडियन नेशनल लोकदल का भविष्य क्या है?  

अभिशप्त आदिवासी

बीते तीन दशकों के दौरान विभिन्न सरकारों ने आदिवासियों और दलितों को उनके कल्याण से जुड़े लगभग पांच लाख करोड़ रुपयों से वंचित किया है. बजटीय आवंटन से उन्हें वंचित करने और उनके लिए आवंटित फंड का दूसरे मदों में इस्तेमाल का खुलासा करती एक रिपोर्ट  

मौत की बांहों में भोपाल

भोपाल गैस कांड के रूप में घटी देश की सबसे भयावह औद्योगिक त्रासदी का यह तीसवां बरस है. दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात में मध्यप्रदेश की राजधानी में यूनियन कार्बाइड के कारखाने में हुए गैस रिसाव से तकरीबन 25,000 लोगों की जान गई. हादसे के मुख्य आरोपित वॉरेन एंडरसन की बीते सितंबर महीने में अमेरिका में मृत्यु हो गई. इस पूरे वाकये में भोपाल के लोगों को कुछ हासिल रहा तो वह थे बस झूठे दिलासे...  

चिंताकारी चाय

चाय में घुली चीनी की मिठास साफ महसूस होती है. लेकिन इसमें डीडीटी जैसे जहर की कड़वाहट भी घुली हो सकती है जो महसूस नहीं होती  

‘ जब मैं सरकारी नौकरी करते हुए नहीं झुका तो चुनाव जीतने पर तो और भी बेहतर काम करूंगा’

हरदेव सिंह के नाम से पहले बाबा तब जुड़ा जब 1985-88 के दौरान वे अलीगढ़ में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रहे. छोटी से छोटी समस्या में भी दिलचस्पी लेकर वे उसे सुलझाकर ही दम लेते. भारत जैसे देश में समस्या आसानी से सुलझना चमत्कार ही माना जाता है इसलिए लोग उन्हें बाबा कहने लगे. ऐसा ही कुछ हरदेव सिंह राजनीति में करना चाहते हैं.