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‘तुम लोग धरना देने में उस्ताद हो, देते रहो’

कौन दिल्ली के सरकारी स्कूलों के अतिथि शिक्षक कब 5 मई 2015 से जारी कहां जंतर मंतर  

‘यह सिर्फ मांग नहीं है, जिंदगी का सवाल है’

कौन उत्तर प्रदेश की आशा बहू कार्यकर्ताएं कब 07-14 अक्टूबर 2014 कहां जंतर मंतर, नई दिल्ली  

‘अब ये लड़ाई नहीं छोड़ी जा सकती’

कौन 1998 से 2001 के बीच दिल्ली में नौकरी से हटाए गए होम गार्ड्स जवान कब 2006 से कहां जंतर मंतर, नई दिल्ली   क्यों ‘आज मेरी उम्र 45 साल है. घर में दो बच्चे हैं. नौकरी तो गई लेकिन परिवार और अपने खर्चे तो बंद नहीं हुए. खाना चाहिए.  

‘नागरिकता नहीं मिली तो जिएंगे कैसे’

कौन पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी कब 19 फरवरी से 22 फरवरी 2014 तक कहां जंतर मंतर (नई दिल्ली) क्यों धरना देखने-समझने के बाद हम चलने को होते हैं कि रवींद्र सिंह हमारे पास आते हैं. शायद उन्हें हमसे तसल्ली देने वाले किसी जवाब की उम्मीद है. वे कहते हैं,  

‘कभी नहीं भूल सकता वो मंजर’

मुझे याद आ रहा है, वह जून महीने की 14 तारीख थी और एफआरआई देहरादून में हम इस चर्चा में मुब्तिला थे कि अगर हम प्रकृति को नहीं समझेंगे तो प्रकृति हमें अपने तरीके से समझाएगी. इस बात को तीन ही दिन बीते थे कि रुद्रप्रयाग से पापा का फोन आया,  

हैं या नहीं
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प्रधानमंत्री को लेकर विकट कांव कांव मची है। प्रधानमंत्री हैं, पर पीएमओ में कुछ काम नहीं हो रहा है। मतलब पीएम पीएम हैं या नहीं, इस पर विकट डाऊट मचे हैं। मैंने एक सीनियर जर्नलिस्ट को पकड़ा और उससे इस बारे में दरियाफ्त की।  सर, पीएम लगता है कि पीएम