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महिला अधिकारों से जुड़ा है समान नागरिक संहिता का मामला

समान नागरिक संहिता लागू करने में कोई तकनीकी मुश्किल नहीं है, बल्कि राजनीतिक मुश्किल है. इस मुद्दे का राजनीतिकरण हुआ है. संविधान सभा में इस पर बहुत बहस हुई थी. डॉ. आंबेडकर ने इसके बारे में बहुत विस्तार से इसके पक्ष में संविधान सभा में बोला था. बहुत बहस-मुबाहिसे के  

पेरुमल मुरुगन : एक फैसले की कहानी

‘यह चिंता का विषय है कि एक विकसित होते समाज के रूप में हमारी सहिष्णुता का स्तर नीचे जाता प्रतीत हो रहा है. किसी भी विपरीत विचार या सामाजिक सोच को समय-समय पर धमकियों और हिंसक बर्ताव का सामना करना पड़ता है. सामाजिक रीति-रिवाजों पर लोगों के भिन्न-भिन्न विचार होते  

‘मुस्लिम मर्दों को अगर कोई चिंता है तो यह कि पत्नी पिटाई और महिला उत्पीड़न के नाजायज हक में कहीं कोई कमी न आ जाए’

मुस्लिम महिलाएं सड़क-मुहल्लों से लेकर देश के स्तर तक मर्दों को मारने-पीटने वाले गिरोहों से लंबी लड़ाई लड़ रही हैं, और दूसरी तरफ मुसलमान मुल्ला-मर्द हैं जो घर के अंदर महिलाओं को पीटने और पीड़ित करने के हक को जारी रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं. मुजफ्फरनगर से लेकर गुजरात  

‘मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल नहीं होना चाहिए’

इस्लाम में तलाक का जो तरीका बताया गया है उसमें यह नहीं है कि एक बार में तीन तलाक दिया जाए. ये एक बार में तीन तलाक देने का जो तरीका लोगों ने अपना लिया है वह इस्लाम की शिक्षाओं और कुरान की हिदायतों के बिल्कुल खिलाफ है. इस्लाम ये  

अगर आप मेरे विचार से सहमत नहीं हैं तो बहस कीजिए, गाली क्यों देते हैं : सागरिका घोष

आप लगातार देख सकते हैं कि जो भी महिला जनता के बीच आ रही है, सवाल उठा रही है, जिसकी जनता के बीच कोई पहचान है, उसको निशाना बनाया जाता है. उसके खिलाफ अश्लील भाषा का इस्तेमाल करते हुए बेहद घटिया तरीके से उस पर हमले किए जाते हैं. मुझे  

‘महिला आयोग से मदद नहीं, पुलिस उड़ाती है मजाक’

कौन बलात्कार की शिकार युवतियां कब 10 मई, 2016 से कहां जंतर मंतर, दिल्ली क्यों शादी का झांसा देकर बलात्कार करने के मामले में न्याय न मिलने और पुलिस द्वारा आरोपियों को बचाने और दिल्ली महिला आयोग के उदासीन रवैये को लेकर. अर्चना, यासमीन, साधना और प्रीति कुछ समय पहले  

‘किसानों की तीन लाख आत्महत्याओं पर कभी कोई बात ही नहीं होती’

मुझे लगता है कि सरकार कृषि के बारे में शायद भूल ही गई है. अक्सर देखा गया है कि चुनाव के पहले सरकारें किसानों की बात करती हैं और सत्ता में आने के बाद सिर्फ कॉरपोरेट की बात करती हैं. बहुत उम्मीद थी मुझे कि सरकार किसानों की तरफ ध्यान  

मोदी सरकार के दावे तो अच्छे हैं, पर जमीन पर क्या है?

आर्थिक मसलों में कुछ खास तो हुआ नहीं है. इन्होंने निवेश वगैरह का जो रास्ता साफ किया, उससे निवेश तो कुछ खास आया ही नहीं है. सरकार के दावे तो अच्छे-अच्छे हैं, लेकिन आप देखिए कि जमीन पर काम कितना हुआ है. निवेश तो आया नहीं. भारत में बाहर से  

‘लग रहा था कि विदेश नीति में कुछ चमत्कार-सा होने जा रहा है लेकिन सब कुछ मोर का नाच साबित हुआ’

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ​ही अद्भुत कार्य किया था. सारे पड़ोसी देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को निमंत्रण दिया था कि उनके शपथ ​लेने के समय भारत आएं. ऐसा संकेत उनके पहले भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने ​नहीं दिया था. उस अवसर की सबसे बड़ी खूबी यह थी  

असु​रक्षित पत्रकार, राष्ट्रपति से गुहार

कौन छत्तीसगढ़ के पत्रकार कब 10 मई, 2016 कहां जंतर मंतर, दिल्ली क्यों छत्तीसगढ़ में चार पत्रकारों को जेल, कई पत्रकारों पर मुकदमा और कई को खबर लिखने पर मिलने वाली धमकियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. नक्सलियों और सरकार की दोहरी मार झेल रहे पत्रकार 10 मई को