साहित्य Archives | Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
हिंदी का सम्मान कभी कम न होगा: हिमानी

हालांकि आज किसी व्यक्ति की काबिलियत उसके अंग्रेजी ज्ञान से आंकी जाती है, तब भी हिंदी में अच्छा साहित्य लिखा और पढ़ा जा रहा है, लेखिका एम जोशी हिमानी ने तहलका को बताया। उत्तराखंड में जन्मी हिमानी हिंदी कहानीकारों में आज जाना माना नाम है। वर्ष 1991 में उनकी पहली  

जमाल की जान

तीन पाए का पलंग-एक पाए को तो दीमकों ने चाट लिया- जमाल चुपचाप लेटा हुआ था। उसे बेहद चिंता हो रही थी। न जाने क्यों खड़ा नहीं हो पा रहा था। उसकी उंगलियां ऊपर और नीचे हो रही थीं। उसके दिमाग में उसका कसा हुआ शरीर घूम रहा था। नहीं!  

‘सत्यमं शिवं सुंदरम के बहाने झलकी भारतीयता

हैदराबाद में आयोजित साहित्यिक समारोह ’हिंदी साहित्य एक विहंगम दृष्टिÓ के बहाने एक ही राज्य से अलग दूसरे राज्य की व्यथा, दो बिछड़े हुए दिलों को जोड़ कर भारतीय एकता की एक मिसाल के तौर पर दिखी। प्रस्तुत किया तेलंगाना की ज़मीन से जुड़े रहे आन्ध्र में पदेन वरिष्ठ पुलिस महानिरीक्षक कुमार विश्वजीत  

हिन्दी कहानी की निरंतर यात्रा

कथा और कहानी का विस्तार ज्यों-ज्यों आकार लेता गया त्यों-त्यों कहानी के शिल्प की बुनावट बदलती गई। कहानी के विषय बदले और कहानी में सघनता, प्रभाव की बात महत्वपूर्ण हो गई। कहानी सन 70 के बाद वैश्विक समस्याओं से ही नहीं जूझती बल्कि अकेलेपन और नगरीय जीवन की बहस में  

कविता पर कुछ सवाल और समकालीन कविता

हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में जो काम हुआ है वह दूसरी भाषाओं की तुलना में खासा विस्तृत,विविध और विद्वतापूर्ण है। यह इसलिए भी हुआ क्योंकि हिंदी भाषा का निर्माण लगातार लोक भाषाओं के विकास के साथ हुआ। आज की हिंदी में इनके शब्द और तेवर भी हैं। साथ ही  

लखनऊ का मतलब सिर्फ नवाब नहीं बल्कि कहार और ब्रास बैंड वाले भी हैं : नदीम हसनैन

लखनऊ पर जितनी किताबें हैं उतनी हिंदुस्तान के बहुत कम शहरों पर लिखी गई हैं. इन सबके बीच आपकी किताब किस तरह से अलग है? दिल्ली और कलकत्ता जैसे शहरों के बारे में जो लिखा गया है उन्हंे मैंने उतनी गहराई से नहीं पढ़ा है. मगर यह काम चूंकि मैं