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हिन्दी कहानी की निरंतर यात्रा

कथा और कहानी का विस्तार ज्यों-ज्यों आकार लेता गया त्यों-त्यों कहानी के शिल्प की बुनावट बदलती गई। कहानी के विषय बदले और कहानी में सघनता, प्रभाव की बात महत्वपूर्ण हो गई। कहानी सन 70 के बाद वैश्विक समस्याओं से ही नहीं जूझती बल्कि अकेलेपन और नगरीय जीवन की बहस में  

कविता पर कुछ सवाल और समकालीन कविता

हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं में जो काम हुआ है वह दूसरी भाषाओं की तुलना में खासा विस्तृत,विविध और विद्वतापूर्ण है। यह इसलिए भी हुआ क्योंकि हिंदी भाषा का निर्माण लगातार लोक भाषाओं के विकास के साथ हुआ। आज की हिंदी में इनके शब्द और तेवर भी हैं। साथ ही  

लखनऊ का मतलब सिर्फ नवाब नहीं बल्कि कहार और ब्रास बैंड वाले भी हैं : नदीम हसनैन

लखनऊ पर जितनी किताबें हैं उतनी हिंदुस्तान के बहुत कम शहरों पर लिखी गई हैं. इन सबके बीच आपकी किताब किस तरह से अलग है? दिल्ली और कलकत्ता जैसे शहरों के बारे में जो लिखा गया है उन्हंे मैंने उतनी गहराई से नहीं पढ़ा है. मगर यह काम चूंकि मैं