स्वतंत्र मिश्र, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
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Articles By स्वतंत्र मिश्र
कचरा-कचरा जिंदगी

‘कुछ साल पहले जब मेरे परिवार के लोगों ने मेरी दीदी के लिए दूल्हा ढूंढना शुरू किया तो बहुत मुश्किलें आ रही थीं. मेरे वालिद किसी के घर रिश्ता लेकर जाते तो लड़के वाले यही कहते थे कि आप भले लोग हैं. लड़की पढ़ी-लिखी और सयानी भी है, लेकिन आप  

लौटने लगे हैं लोग मेरे गांव के…

उत्तर प्रदेश के कानपुर की अनिता मिश्रा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की और ‘गृहलक्ष्मी’ पत्रिका से जुड़ गईं. अचानक एक दिन घर से फोन आया कि उनके पिताजी पक्षाघात के शिकार हो गए. वे अपने पिता की सेवा-सुश्रूषा के लिए कानपुर चली गईं.  

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मुद्दों की लड़ाई से दूर पत्रकार यूनियन

पिछले दिनों एक मीडिया समूह ने 50 पत्रकार और गैर-पत्रकार कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. मीडिया समूहों के लिए यह कोई नई बात नहीं थी. इससे पहले भी अलग-अलग संस्थानों से कभी 150 तो कभी 350 लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है. वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट  

संपादक या तानाशाह

कुछ बरस पहले एक दिन सुबह-सुबह बिंदु (बदला हुआ नाम) का फोन आया. वो बहुत ही घबराई हुई लग रही थी. मुझे थोड़ा-बहुत अंदाजा तो लग गया लेकिन बिंदु ने जो बताया, वह मेरी कल्पना से परे था. बिंदु अपनी पीड़ा साझा करते हुए कभी सिसकती और कभी रोने लग  

तबाही का इंतजार करती दिल्ली

धरती हर पल बदलावों की ओर बढ़ रही है और इंसान खतरों की ओर. दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी को भूकंप का एक बड़ा झटका लग सकता है और इससे होने वाला नुकसान परमाणु हमले से भी कई गुना ज्यादा होगा  

‘डोंगी से यात्रा में बार-बार महसूस हुआ कि आगे बढ़ना मुश्किल है’

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक राकेश तिवारी की मूल प्रकृति में घुमक्कड़ी का वास बहुत छोटी उम्र में ही हो गया था. पिता भी उन्हें घूमने को उकसाते. घूमने का शौक ऐसा चढ़ा कि 21 साल की उम्र में साइकिल उठाई और लखनऊ से काठमांडू निकल गए. घुमक्कड़ी के साथ-साथ लिखने का भी शौक जारी रहा. यात्रा वृतांत के तौर पर उनकी पहली किताब ‘पहियों के इर्द-गिर्द’ प्रकाशित हुई. इस यात्रा के दो साल बाद ही उन्होंने डोंगी (नौका)...  

लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर

लुगदी कहकर जिस साहित्य को अब तक खारिज किया जाता रहा, उसे मुख्यधारा में तवज्जो मिलने लगी है  

‘माओवादियों को हर तरह के अतिवाद से बचना होगा’

रामशरण जोशी पत्रकार, संपादक, समाजविज्ञानी और मीडिया के अध्यापक रहे हैं. वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल में पांच सालों तक पूर्णकालिक प्रोफेसर रहे. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में विजिटिंग प्रोफेसर रहे. प्रो. जोशी राष्ट्रीय बाल भवन के अध्यक्ष और केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे . इनकी महत्वपूर्ण कृतियां में आदमी, बैल और सपने, आदिवासी समाज और विमर्श, 21वीं सदी के संकट, मीडिया विमर्श आदि हैं. हाल...  

तालाब से बदला ताना-बाना

मध्यप्रदेश के मालवा में एक बहुत पुरानी कहावत आज भी लोकप्रिय है – ‘पग-पग रोटी, डग-डग नीर.’ लेकिन आज उसी मालवा के ज्यादातर इलाके बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि मालवा के एक कस्बे में पानी को माफियाओं से बचाने के लिए चंबल