संजय दुबे, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
संजय दुबे
संजय दुबे

कार्यकारी संपादक

Articles By संजय दुबे
छह साल पर शून्यकाल

तहलका की हिंदी पत्रिका को छह साल पूरे हो गए. जुलाई या 2007 का अगस्त माह रहा होगा जब मैं प्रभाष जी के पास गया था. हम तहलका की हिंदी वेबसाइट शुरू करने की योजना बना रहे थे. संकर्षण ठाकुर को, जो उस समय तहलका की अंग्रेजी पत्रिका संपादक थे,  

एक अस्वस्थ परंपरा की शुरुआत

जस्टिस सदाशिवम के राज्यपाल बनने में कोई कानूनी अड़चन भले न हो, ऐसा करना सही नहीं है ऐसा मानने में भी कोई अड़चन नहीं है  

पंकज-राजनाथ विवाद : देखने के कुछ सीधे और कुछ कम सीधे तरीके

पिछले कुछ दिनों से जितनी भी चर्चाएं बाजार में हैं उनके केंद्र में नरेंद्र मोदी की हर चीज पर नजर और नियंत्रण रखने वाली छवि भी है  

दिल्ली विधानसभा चुनावः  आप की चुस्ती, भाजपा की सुस्ती

पिछले कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी के बार-बार बयान आ रहे हैं कि दिल्ली की विधानसभा भंग होनी चाहिए और तुरंत चुनाव कराए जाने चाहिए. अपनी मांग को लेकर वे हाल ही में दिल्ली के उपराज्यपाल से भी मिले. इस पर पार्टी ने अदालत में एक याचिका भी दायर  

‘लोग संगठन बनाकर चुनाव लड़ते हैं हमने चुनाव के जरिए संगठन बनाया है’

चुनाव की हड़बड़ी, पार्टी के भीतर घमासान और दूसरे तमाम मुद्दों पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया की तहलका के कार्यकारी संपादक संजय दुबे और ब्यूरो प्रमुख अतुल चौरसिया से हुई बातचीत  

जजों की नियुक्तिः बदलाव जरूरी हैं

हो सकता है कि जजों की नियुक्ति की वर्तमान कॉलेजियम वाली व्यवस्था पिछले चलन से बेहतर हो लेकिन 20 साल बाद इस व्यवस्था से बेहतर बनाने की सोचने और फिर उसे बनाने में बुराई क्या है?  

केजरीवाल इतनी जल्दी में क्यों हैं?

पिछले कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी के बार-बार बयान आ रहे हैं कि दिल्ली की विधान सभा भंग होनी चाहिए और तुरंत चुनाव कराए जाने चाहिए. अपनी मांग को लेकर वे हाल ही में दिल्ली के उपराज्यपाल से भी मिले. इस पर पार्टी ने अदालत में एक याचिका भी  

कुछ जवाब जस्टिस काटजू को भी देने हैं.

जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने अपने ताजा ब्लॉग में लिखा है कि वे जब मद्रास हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे तब वर्ष 2004 में वहां के एक अतिरिक्त न्यायाधीश की कई शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश से कहकर इसकी आईबी जांच कराई थी. आईबी की रिपोर्ट ने  

एक और अंतरिम बजट

कई लोगों को बजट में यूपीए सरकार की झलक मिल रही है. हालांकि मुश्किल तो तब होनी चाहिए थी जब ऐसा नहीं होता.  

शिक्षण नहीं प्रशिक्षण जरूरी

केंद्रीय मंत्री बनने के लिए शिक्षित होना जरूरी नहीं है, लेकिन थोड़ा प्रशिक्षित होने में क्या बुराई है?