रवीश कुमार, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
रवीश कुमार
रवीश कुमार
Articles By रवीश कुमार
लोग पत्रकारों को गाली दे रहे हैं, अगर समाज इसे मान्यता देता है तो मैं उसे माला पहनाना चाहता हूं: रवीश

मेरा तो मानना है कि ये संगठित तरीका है और ये हर स्तर पर हो रहा है. देश में पार्टी के कार्यकर्ता कहीं भी हो सकते हैं, वहां से ये शुरू हो जाते हैं. तरह-तरह के वाट्स ऐप ग्रुप बने हुए हैं. वहां से इन बातों को फैलाया जाता है.  

कभी रवीश कुमार मत बनना

अपने आप को नौजवानों की आंखों में चमकते देखना किसे नहीं अच्छा लगता होगा. कोई आप से मिलकर इतना हैरान हो जाए कि उसे सबकुछ सपने जैसा लगने लगे तो आप भी मान लेंगे कि मुझे भी अच्छा लगता होगा. कोई सेल्फी खींचा रहा है कोई ऑटोग्राफ ले रहा है.  

पड़ोस का राष्ट्रवाद और मैकडॉनल्ड की दुकान  नजरिया

मेरे घर की खिड़की से पीले रंग का एम दिखने लगा है. दसवीं मंजिल पर फ्लैट की खिड़की से बराबर में दिखता है एम. मैकडॉनल्ड अमेरिका से चल कर मेरे पड़ोस में आ गया है. अमेरिका का स्ट्रीट फूड इंडिया में रेस्त्रां के नाम से चल रहा है. व्यस्त मध्यमवर्गीय