राम यादव, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
राम यादव
राम यादव
Articles By राम यादव
प्रथम विश्वयुद्ध : हिंदुस्तान की लड़ाई

2014 पहले विश्वयुद्ध की सौवीं वर्षगांठ है. जब भारत अंग्रेजों से अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, तब भारत के सैनिक अंग्रेजों के लिए यह महासंग्राम लड़ रहे थे. इस युद्ध में अंग्रेजों को विजय तो मिली, लेकिन भारत और भारतीयों के लिहाज से इस विजय में कुछ भी सम्मानजनक नहीं था  

प्रथम विश्व युद्ध: छले गए जो वीर

अपने स्वतंत्रता संग्राम से पहले भारत ने एक महासंग्राम अंग्रेजों की आन-बान और शान के लिए लड़ा था. प्रथम विश्वयुद्ध कहलाने वाले उस महासंग्राम में अंग्रेजों की विजय से न तो भारत को स्वतंत्रता मिली और न ही भारतीय सैनिकों को मान-सम्मान  

‘जुड़ते यूरोप के टूटते देश’

अतीत में दूसरों को तोड़ने वाले यूरोप के पूंजीवादी देश अब खुद टूट रहे हैं  

‘मलेशियाई विमान को किसने गिराया?’

पूर्वी यूक्रेन में मलेशियाई विमान मार गिराया जाना पश्चिमी देशों के लिए रूस को नीचा दिखाने का ऐसा सुनहरा मौका बन गया है, जिसमें किसी अनचाहे युद्ध के मनचाहे बहाने मिल सकते हैं  

बड़े भाई का ‘बिगब्रदर-पन’

जर्मनी अमेरिका का परम मित्र ही नहीं, नाटो के भीतर व बाहर उसका जाना-माना जी-हुजूर भी है. पर इसका यह मतलब नहीं कि दुनियाभर में जासूसी कर रहा अमेरिका जर्मनी में जासूसी से परहेज करने लगे.  

फीफा का फाउल फुटबॉल

ओलंपिक खेल हों या फुटबॉल का विश्व कप, खेलों के अंतर्राष्ट्रीय महामेले खेल नहीं रहे. वे राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का झंडा गाड़ने, मनचाही लूट-खसोट और घूसखोरी का हथकंडा बन गए हैं.  

मोदी के बहाने भारत पर निशाने

छह हफ्ते तक जिस पश्चिमी मीडिया को भारत में हो रहे आम चुनाव की सुध नहीं थी उसका एक बड़ा हिस्सा चुनाव परिणाम आते ही इसे हिंदू राष्ट्रवाद की विजय बताते हुए बौखलाता सा दिखने लगा  

शीतयुद्ध की बढ़ती गर्मी

यूक्रेन-संकट पर अमेरिका और रूस में नित नई घुड़कियों वाले प्रचार-युद्ध की गर्मी जिस तरह बढ़ रही है उसकी आंच से कहीं सच्चे युद्ध की आग न लग जाए.  

जो बली उसी की चली

यूक्रेन इसका सबसे नया उदाहरण है कि 21वीं सदी की दुनिया 20वीं सदी में लौट रही है. अंतरराष्ट्रीय कानून हो या आत्मनिर्णय का अधिकार, सही वही है, जिसके पास बाहुबल है.  

यूरोप के अनाथ भारतवंशी

यूरोप के सबसे बड़े जातीय अल्पसंख्यक रोमा और सिंती इस कदर हाशिये पर हैं कि हर जगह दुत्कारे ही जाते हैं. उनके मूल देश भारत ने भी उनसे मुंह फेर लिया है