प्रो. सच्चिदानंद, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
प्रो. सच्चिदानंद
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Articles By प्रो. सच्चिदानंद 
एक तरह की सामूहिक आकांक्षा है राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद का जो मुद्दा है, संविधान में उसके सारे प्रावधान निहित हैं. क्योंकि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में राष्ट्रवाद संविधान में आस्था और संवैधानिक प्रक्रियाओं से ही उभर सकता है. और कोई दूसरा तरीका शायद कामयाब नहीं हो. राष्ट्र के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है  

‘असली निशाना तो जेएनयू की संस्कृति  और लोकतांत्रिकता है’

  देखिए, पहली बात कि मैं यह कन्फर्म नहीं कर सकता कि नौ फरवरी को वह घटना घटी या नहीं, क्योंकि मैं डीयू में एक सेमिनार में था. इसलिए उस घटना के बारे में कोई राय नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि मान लिया ऐसी कोई