हरिशंकर परसाई, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
हरिशंकर परसाई
हरिशंकर परसाई
Articles By हरिशंकर परसाई
आवारा भीड़ के खतरे : हरिशंकर परसाई

एक अंतरंग गोष्ठी सी हो रही थी युवा असंतोष पर. इलाहाबाद के लक्ष्मीकांत वर्मा ने बताया- पिछली दीपावली पर एक साड़ी की दुकान पर कांच के केस में सुंदर माॅडल खड़ी थी. एक युवक ने एकाएक पत्थर उठाकर उस पर दे मारा. कांच टूट गया. आसपास के लोगों ने पूछा  

ठिठुरता हुआ गणतंत्र

चार बार मैं गणतंत्र दिवस का जलसा दिल्ली में देख चुका हूं. पांचवी बार देखने का साहस नहीं. आखिर यह क्या बात है कि हर बार जब मैं गणतंत्र समारोह देखता, तब मौसम बड़ा क्रूर रहता. छब्बीस जनवरी के पहले ऊपर बर्फ पड़ जाती है. शीतलहर आती है, बादल छा  

एक गोभक्त से भेंट

एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए. ऊंचे, गोरे और तगड़े साधु थे. चेहरा लाल. गेरुए रेशमी कपड़े पहने थे. पांवों में खड़ाऊं. हाथ में सुनहरी मूठ की छड़ी. साथ एक छोटे साइज का किशोर संन्यासी था. उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था और वह गुरु को  

हम बिहार में चुनाव लड़ रहे हैं

पाठकों, मैं वह हरिशंकर नहीं हूं, जो व्यंग्य वगैरह लिखा करता था. मेरे नाम, काम, धाम सब बदल गए हैं. मैं राजनीति में शिफ्ट हो गया हूं. बिहार में घूम रहा हूं और मध्यावधि चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा हूं. अब मेरा नाम है- बाबू हरिशंकर नारायण प्रसाद सिंह याद  

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : सीधे-सादे और जटिल

चिर विद्रोही मुक्तिबोध किसी भी चीज से समझौता नहीं करते थे, अर्थशास्त्र के सिद्धांतों और स्वास्थ्य के नियमों से भी नहीं. वह संबंधों में लचीले थे, मगर विचारों में इस्पात की तरह. पैसे-पैसे के लिए तंग रहते थे, पर पैसे को लात भी मारते थे. एक संस्मरण