दीपक गोस्वामी, Author at Tehelka Hindi | Page 4 of 4 — Tehelka Hindi
दीपक गोस्वामी
दीपक गोस्वामी
Articles By दीपक गोस्वामी
मुझे चार माह का गर्भ था, जब मेरे पति का देहांत हुआ, उनकी आखिरी इच्छा थी नेत्रदान

‘उनकी मौत एक सड़क दुर्घटना में हुई थी. वे हमेशा ही नेत्रदान करने के लिए कहा करते थे. उनका मानना था कि अगर माैत के बाद हम अपनी आंखों से किसी और की दुनिया रोशन कर सकें तो भला इससे अच्छा और क्या होगा? वे मां-बाबूजी का भी नेत्रदान का  

मैंने मां की आंखें दान की थीं  लेकिन लिस्ट में हमारा नाम नहीं

‘हमारे भांजे को एनीमिया हुआ था. उसे हर हफ्ते-दस दिन में खून की जरूरत पड़ती थी. उस समय ऐसे-ऐसे लोगों ने हमें खून दान में दिया था जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. बस उसी समय माताजी ने मन बना लिया था कि उन्हें भी ऐसा कुछ  

दान की  आंखें  कूड़ेदान में

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में दान में मिली आंखों के कूड़ेदान में मिलने से प्रबंधन सवालों के घेरे में है