आनंद प्रधान, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
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Articles By आनंद प्रधान
‘कांग्रेस ने छात्रसंघों का अपराधीकरण किया’

छात्र राजनीति के लगभग खात्मे की कोई एक वजह नहीं है. ऐसी बड़ी सामाजिक-राजनीतिक परिघटना के अनेक कारण होते हैं. 70 के दशक के बाद बदलाव का बड़ा बिंदु है आपातकाल. उस दौरान दो चीजें हुईं. एक तो आपातकाल के खिलाफ बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ. जिसमें समाजवादी छात्र संगठन,  

दूरदर्शन: एक स्वप्न भंग की दास्तां

निजी चैनलों के सार्वजनिक हित और उससे जुड़ी प्राथमिकताओं को नजरंदाज़ करने और मनोरंजन के नाम पर सस्ते-फूहड़-फिल्मी मनोरंजन को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति भी किसी से छुपी नहीं है. वे लोगों के वास्तविक मुद्दों के बजाय छिछले, सनसनीखेज और हल्के मुद्दों को बड़ा बनाकर उछालने में लगे रहते हैं.  

कूटनीति बड़ी कि तमाशा !

मोदी की अमेरिका यात्रा दिखाते चैनलों के पास तत्व कम था, तमाशा ज्यादा  

असहमति का अधिकार

अपने संस्थानों की नीति से पत्रकारों की असहमतियां सार्वजनिक क्यों न हों?  

गाजा संकट से उपजे सवाल

वैश्विक खबरों की कवरेज के मामले में देसी मीडिया का बौनापन साफ दिखता है  

चैनलों का ‘ओमेर्ता कोड’

आखिर क्यों कोई चैनल दूसरे चैनल से जुड़ी घटना की रिपोर्ट नहीं करता?  

हिंदी मीडिया का ‘अंग्रेजी लाओ’ आंदोलन…

क्या अंग्रेजी की भाषायी श्रेष्ठता के सामने अपनी हीनता की ग्रंथि से निकला है.  

केजरीवाल बनाम चैनल

केजरीवाल के बयान और चैनलों की प्रतिक्रिया, दोनों में सवालिया अतिरेक है  

मोदी या प्रचारतंत्र की जीत?

इन चुनावों में कॉरपोरेट मीडिया वह करने में कामयाब रहा पहले नहीं कर पाया था.  

पत्रकारिता का ‘जनपक्ष-विपक्ष’

कोई पत्रकार किसी नेता-पार्टी से ‘नत्थी’ दिखे तो इसे फिसलन की शुरुआत क्यों न कहें?