राकेश सिन्हा, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
राकेश सिन्हा
राकेश सिन्हा
Articles By राकेश सिन्हा
राष्ट्रवाद की बहस पुनर्जीवित हुई है

राष्ट्रवाद की परिभाषा और राष्ट्रवाद का वर्तमान संदर्भ दोनों को समझना पडे़गा. वर्तमान संदर्भ फिर से उस बहस को पुनर्जीवित कर रहा है जिस बहस को 1920 में रोक दिया गया था. मैं 1920 इसलिए कह रहा हूं कि बाल गंगाधर तिलक का निधन 1920 में हुआ था. औपनिवेशिक काल  

सामाजिक प्रगतिशीलता के बहुत से प्रश्नों पर संघ और बाबा साहेब में समानता रही है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आजादी से पहले मुख्य प्रभाव क्षेत्र महाराष्ट्र में था और सामाजिक रूढ़िवादिता के बीच में संघ ने प्रतिक्रियावादी सामाजिक प्रथाओं का जमकर विरोध किया. उसके दो उदाहरण हैं. पहला, जब महात्मा गांधी कौतूहलवश 1934 में संघ के शिविर में आए तो उन्होंने पाया कि ब्राह्मण और  

घबराए वामपंथी चला रहे राजनीतिक मुहिम

भारतीय संस्कृति और दर्शन का एक सूत्र-वाक्य है ‘नेति-नेति’, जिसका अर्थ होता है यह भी नहीं वह भी नहीं. अर्थात भारतीय समाज प्रकृति से प्रयोगधर्मी और विमर्शात्मक है. संक्षेप में शास्त्रार्थ हमारी सभ्यताई परंपरा है, इसलिए प्रयोगधर्मिता और विमर्शात्मकता बनी रहनी चाहिए और इस पर चोट करने वाली किसी भी