उपन्यास अंश: और सिर्फ तितली

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इस पर तान्या मैम मुस्करा दीं और उसके नन्हे हाथों से उन्होंने बैग ले लिया. सारन्या की इस अदा पर तान्या मैम को दुलार आ गया और उन्होंने उसे गोद में उठा लिया. सारन्या को मैम की गोद में देख कर सुप्रिया अंदर से भभक पड़ी. वह कुछ हरकत करती की उससे पहले सारे बच्चे फोटो सेशन के लिए कामप्लेक्स में बने एक स्टेज पर की ओर बढ़ गए. तान्या मैम ने लंबाई के हिसाब से बच्चों का जमाना शुरू किया, ताकि किसी बच्चे का फोटो में चेहरा न छिप जाए. सुप्रिया की लंबाई कुछ बच्चों से ज्यादा थी. नतीजतन उसे दूसरी पंक्ति में दाहिने ओर जगह मिली. उसने देखा कि मैम की चहेती सारन्या पहली पंक्ति में बीचों बीच खड़ी है. अब सुप्रिया के गुस्से की कोई सीमा नहीं रही. वैसे भी कोई कैसे सोचता है, क्या करता है, क्या बोलता है, वह इन सबसे बेपरवाह थी. वह क्लास में भी अकेले रहने वाली लड़की थी. दूसरे बच्चे उससे दूरी बना कर ही चलते थे. वह आवाज, सुंगध, स्पर्श, प्यार, घूरने आदि किसी बात पर रिएक्ट कर सकती थी. उसे दुनिया के हर शख्स से संवाद में मुश्किल होती थी. अपने माता-पिता से भी. उसकी अपनी दुनिया थी या फिर यूं कहा जा सकता है कि वह उसमें बचपन से जकड़ी हुई थी. असल में सुप्रिया ऑटिज्म नामक बीमारी से ग्रस्त थी. ऑटिज्म एक प्रकार का न्यूरो बिहैविरल डिसआर्डर है. इसके लक्षण तीन-चार साल की उम्र से दिखने लगते है. आसपास के बच्चे जब खेलकूद में लगे रहते थे, तो सुप्रिया अपनी दुनिया में खोई रहती थी. उसे खिलौनों से भी नफरत थी. उसने कीमती से कीमती खिलौनों को कबाड़ बना दिया था.

सुप्रिया को असमाजिकता का दौरा पड़ा. वह अपने से बाहर हो गई. पंक्ति को तोड़ते हुए वह सीधे फोटोग्राफर के पास पहुंची और उसके कैमरे की बेल्ट से लटक गई. वैसे तान्या मैम और बच्चे उसकी ऐसी हरकतों से वाकिफ थे, तो तमाशा को सबने तमाशा न समझा. तान्या मैम सारन्या की ही तरह सुप्रिया का भी बहुत ख्याल रखती थी. उन्होंने सुप्रिया को काबू करने की कोशिश की, लेकिन वह काबू नहीं हुई. अंतत: वह फोटो शूट में शामिल नहीं हुई. उसके बिना ही फोटो शूट हुआ. तान्या मैम को इस बात से बहुत दुख हुआ. वह स्कूल लौटते हुए बस से लेकर क्लास तक उसके साथ रहीं. उसे दुलारा-पुचकारा. वह तब जा कर शांत हुई, जब तान्या मैम ने सायोना के कैमरे उसे उसके साथ फोटो खिंचवाई.

लंच ब्रेक की घंटी बज चुकी थी. पार्टी तो पहले ही हो चुकी थी, तो सबके पेट फुल थे. बच्चे अपने-अपने कैमरे से मैम के साथ फोटो खिंचवाने लगे. तभी उदय प्रकाश ने अपने टिफिन से केक का एक टुकड़ा निकाला. बीते कल उसका जन्मदिन था. वैसे तो हर बच्चे के जन्मदिन पर क्लास में हैप्पी बर्थडे मनाया जाता था. जिस बच्चे का जन्मदिन होता था, वह बच्चा अपने घर से सबके लिए कुछ न कुछ गिफ्ट लाता था. और केक भी कटता था. लेकिन उदय प्रकाश के पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह क्लास की इस रस्म को पूरा कर सकते. वे एक सामान्य से चौकीदार की नौकरी करते थे और कल्लन साहब की कोठी के आउट हाउस मे रहते थे. कल्लन साहब नेक दिल इंसान थे. उन्हीं की बदौलत उदय प्रकाश को सोफिया इंटरनेशनल में एडमीशन मिल गया था. पिता तो पिता ठहरे. वे उदय प्रकाश का मन नहीं दुखाना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने उदय प्रकाश का मन रखने के लिए अपने घर में ही एक छोटा सा केक कटवा दिया था, ताकि उसे दुख न हो. उसी केक का एक टुकड़ा वह अपनी गुरू मैम के लिए लाया था. शायद गुरू दक्षिणा के तौर पर. सहमे हुए उसने केक का टुकड़ा मैम की तरफ यह कहते हुए बढ़ाया- ‘मैम इनकार मत करियेगा. बडे़ दिल से लाया हूं. कल मेरा जन्मदिन था. खाने से इंकार करेंगी तो मैं तो नाराज नहीं होऊंगा ये केक नाराज हो जायेगा.’

तान्या मैम इमोशनल हो गईं उसकी इस बात पर. उन्होंने कहा- ‘ये तो मैं खा ही लूंगी पर तुमने कल क्यों नहीं बताया कि तुम्हारा जन्मदिन था. हम सब मिलकर मनाते. चलो कोई बात नहीं आज हम सेलीब्रेट करेंगे तुम्हारा जन्मदिन. बिलेटेड़ हैप्पी बर्थ डे.’

प्यार भरी फटकार उदय प्रकाश को सुनाने के बाद तान्या मैम ने कैंटीन से सैंडविच और चाकलेट मंगवाए. और धूमधाम से उदय प्रकाश का जन्मदिन मनाया. जो बच्चे उदय प्रकाश को अपने से अलग मानते थे, उन्होंने भी उसे विश किया. असल में इस तरह के स्कूलों में नव कुबेर के बच्चे पढ़ते हैं. उनकी दुनिया अमीरी और गरीबी में बंटी होती है. उनके विकास की पहली अंतिम शर्त भेदभाव होती है. ऐसा उनके परिवार के लोग सिखाते हैं. ऐसी बात उन्हें सिखाई जाती है, जो उनके निश्छल मन में होती ही नहीं है. ये गंदा है वो गंदा है, यहां से चीजें शुरू होती है. तान्या मैम ने उनके मनों में उदय प्रकाश के प्रति हमदर्दी पैदा करके इस खाई को पाटने की कोशिश की. लेकिन वे जिस समाज में रहते हैं, क्या वे इस सबक को याद रख पायेंगे. याद रखने की कोशिश भी करें ये तो भी शायद ये ज्ञान की ऊंची इंटरनेशनल दुकानें उन्हें ऐसा न करने दें. आखिर गंदा है पर धंधा जो ठहरा.

अब विदाई का समय आ गया था. बच्चों को पता था कि उनका आज इस क्लास में आखिरी दिन है. तान्या मैम अब अगले क्लास में उन्हें नहीं मिलने वाली हैं. बच्चों की आंखें भर आईं थीं. नंदनी ने तान्या मैम को अपने हाथों से बनाया एक चित्र भेंट किया. उस चित्र में रंग बिरंगें फूल थे. उसमें एक तितली भी थी. उसमें लिखा था- ‘आई लव यू तान्या मैम…’

(वाणी प्रकाशन से शीघ्र प्रकाशित)

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