पढ़ाई नहीं कमाई का जरिया बनते शिक्षण संस्थान | Tehelka Hindi

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पढ़ाई नहीं कमाई का जरिया बनते शिक्षण संस्थान

पिछले दिनों तमिलनाडु के एक निजी शिक्षण संस्थान की तीन छात्राओं की आत्महत्या के बाद उच्च शिक्षा के निजीकरण के खतरों की ओर एक बार फिर लोगों का ध्यान गया

2016-04-15 , Issue 7 Volume 8
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बीते दिनों तमिलनाडु के एक निजी कॉलेज में प्रताड़ना से तंग आकर कथित रूप से तीन छात्राओं वी. प्रियंका, टी. मोनिशा और ईसरण्या ने खुदकुशी कर ली थी.

तमिलनाडु में शिक्षा के निजीकरण की शुरुआत 80 के दशक में तब हुई जब एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) राज्य के मुख्यमंत्री थे. यह देखते हुए कि ग्रामीण नशे के अभिशाप से व्यापक तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, एमजीआर ने ताड़ी के उत्पादन, खरीद तथा उपभोग पर पाबंदी लगा दी जबकि भारत निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) के लिए अनुमति बनाए रखी. नतीजा यह हुआ कि राज्य के शराब व्यापारी एमजीआर के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके सरकार के खिलाफ हो गए. संयोग से ये लोग पहले सरकार के समर्थक हुआ करते थे और इन्होंने चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को चंदा भी दिया था. शराब व्यापारियों को खुश करने के लिए एमजीआर ने कर्नाटक की तर्ज पर उनके लिए स्ववित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों का आवंटन किया. इस तरह तमिलनाडु में भी उच्च शिक्षा में निजीकरण का दौर शुरू हुआ.
सामाजिक कार्यकर्ता और मद्रास इंस्टिट्यूट आॅफ डेवलपमेंट स्टडीज में एसोसिएट प्रोफेसर सी. लक्ष्मण कहते हैं, ‘पिछले कुछ दशकों से तमिलनाडु में अवैध शराब व्यापारी, दलाल और तस्कर आदि उच्च शिक्षा को संभाल रहे हैं. ये लोग तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों को संभाल रहे हैं. इन शैक्षणिक संस्थानों की शासकीय परिषदों में भी इन लोगों की पहुंच है. द्रविड़ पार्टियों के सत्ता में आने के बाद शिक्षा एक व्यापार बन चुकी है और इसकी गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हुई है. इसके अलावा इन लोगों द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों में उन विद्यार्थियों को राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं होने दिया जाता जिनका शोषण और दमन होता है.’

हाल ही में विल्लुपुरम जिले के कल्लाकुरिची स्थित एसवीएस योगा एेंड नेचुरोपैथी कॉलेज की तीन छात्राओं की आत्महत्या ने उच्च शिक्षा के निजीकरण के खतरों की ओर एक बार फिर ध्यान खींचा है. इन छात्राओं के सुसाइड नोट से यह स्पष्ट होता है कि कॉलेज प्रबंधन से मतभेद जाहिर करने पर उन्हें इस कॉलेज में काफी तंग और अपमानित किया गया. गौरतलब है कि वर्ष 2015-16 में डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से इस कॉलेज को प्राप्त मान्यता खत्म हो गई थी, इसके बावजूद कॉलेज ने अपनी वेबसाइट पर ‘मान्यता प्राप्त’ के उल्लेख को नहीं हटाया था. छात्राओं ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्हें कक्षाएं साफ करने के लिए कहा जाता था, खराब खाना देने के साथ अपमानित किया जाता था. जब कॉलेज प्रबंधन और मद्रास हाई कोर्ट से न्याय पाने की उनकी कोशिशें लगातार नाकाम होती गईं तो उन्होंने यह अतिवादी कदम उठाया.

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 8 Issue 7, Dated 15 April 2016)

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