हिमाचल उपचुनाव में भाजपा की जय

मजबूत बागियों के मैदान में होने के बावजूद दोनों सीटें जीतकर भाजपा ने कांग्रेस को तगड़ा झटका दिया है।

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बागियों के चुनाव में उतरने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ने दोनों सीटें जीत ली हैं। इसे मुख्यमंत्री जयराम के बड़ी उपलब्धि माना जाएगा क्योंकि दोनों ही सीटों – पच्छाद और धर्मशाला – में उसके दोनों बागी बहुत मजबूत थे और जनता की सहानुभूति भी उनके साथ थी।

खुद को बहुत अनुशासित मानने वाली भाजपा में बगावत के सुर खुलकर सुने गए। दोनों हलकों में बहुत प्रयासों के बावजूद बागी नहीं माने। यहाँ तक कि खुद मुख्यमंत्री जयराम ने व्यक्तिगत रूप से इसकी कोशिश की। जब बागी नहीं माने तो सीएम को खुद चुनाव की बागडोर और रणनीति संभालनी पड़ी।  इस चुनाव में सबसे बड़ा धक्का कांग्रेस को लगा है जो धर्मशाला में तो तीसरे नंबर पर पहुँच गयी और वहां उसकी जमानत भी नहीं बची। पच्छाद में भाजपा की बागी दयाल प्यारी ने दिखा दिया कि टिकट के लिए उन्होंने लड़ाई क्यों लड़ी थी। पछाड़ में कांग्रेस के कद्दावर नेता गंगू राम मुसाफिर मैदान में नहीं होते तो वहां भी कांग्रेस के हालत खराब रहती। मुसाफिर का इलाके में अपना वोट बैंक है जिसके बूते वे दुसरे नंबर पर रहे।

मई में जब लोकसभा चुनाव हुए थे तब धर्मशाला विधानसभा हलके में भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर को 18685 वोटों की बढ़त मिली थी जिससे भाजपा वहां मजबूत तो लग ही रही थी। लेकिन उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार विशाल नैहरिया की जीत का अंतर 6758 रह गया। यह लोकसभा चुनाव लीड का एक तिहाई ही है। वहां भाजपा के बागी राकेश चौधरी ने काफी दम दिखाया। पच्छाद में भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप ने करीब 16 हजार मतों की बढ़त हासिल की थी, जो उपचुनाव में घटकर 2742 रह गई। वहां भी भाजपा बागी ने दम दिखाया।

इन चुनाव नतीजों से भाजपा और मुख्यमंत्री को मजबूती मिली है जबकि कांग्रेस के लिए यह चुनाव काफी आघात दे गए हैं। प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले कांगड़ा ने उपचुनाव में भी अहम रोल निभाया है। कांग्रेस ने धर्मशाला सहित पछाड़ में कांग्रेस से पहले प्रत्याशी घोषित कर शुरुआती बढ़त हासिल कर ली थी। शुरू से ही भाजपा धर्मशाला से गद्दी समुदाय को प्रतिनिधित्व देती रही है। इस बार कांग्रेस ने इसी समुदाय के विजयइंद्र कर्ण को टिकट देकर भाजपा को कड़ी टक्कर देने का प्रयास किया। कांग्रेस के इस प्रयास से यहां पर जातिवाद की हवा भी चल पड़ी।

हवा का रुख देखकर भाजपा से छिटके राकेश चौधरी ने ओबीसी के करीब 35 प्रतिशत वोटों के दम पर जीत हासिल कर विधानसभा की दहलीज लांघने का प्रयास किया। प्रचार के दौरान राकेश चौधरी ने समुदाय के लोगों को साथ लेकर शक्ति प्रदर्शन का प्रयास भी किया लेकिन यहां पर किसी तरह का जातिवाद नहीं चला। धर्मशाला प्रदेश की दूसरी राजधानी है। यहां पर अधिकतर लोग अन्य स्थानों से आकर बसे हैं। हलके में अधिकतर तबका पढ़ा लिखा है जो जातिवाद नहीं बल्कि हर चीज को तौल कर देखता है। यहां चौधरी बिरादरी के वोटों को हथियाने के निर्दलीय प्रत्याशी ने हरसंभव प्रयास किया। चौधरी बहुल मतदान केंद्रों में मतप्रतिशतता भी बढ़ी।

नतीजों के बाद कांग्रेस तो मंथन कर पार्टी काडर पर ध्यान देना होगा। नेताओं के आपसी टकराव का नुकसान पार्टी को झेलना पड़ा है। पूर्व मंत्री और धर्मशाला से पूर्व में प्रत्याशी रहे सुधीर शर्मा का चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हलके में पहुंचना कार्यकर्ताओं को अखरता रहा है। पार्टी प्रत्याशी ने तो उन पर भाजपा का साथ देने का आरोप भी लगाया है और बाकायदा आलाकमान को चि_ी लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।