‘हम जैसे लोगों को लोकसभा जाकर कानून बदलने होंगे’ | Tehelka Hindi

झारखंड A- A+

‘हम जैसे लोगों को लोकसभा जाकर कानून बदलने होंगे’

कभी किसी के घर में काम करते हुए कॉमर्स में एमए करने वालीं दयामणि बरला झारखंड की चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता हैं. आदिवासी अधिकारों के लिए काम करते हुए उन्होंने राज्य में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ चर्चित लड़ाइयां लड़ी हैं.
2014-04-30 , Issue 8 Volume 6
दयामणि बरला. उम्र-44 वर्ष. सामाजिक कार्यकर्ता. खूंटी, झारखंड

दयामणि बरला. उम्र-44 वर्ष.
सामाजिक कार्यकर्ता. खूंटी, झारखंड. फोटोः राजेश कुमार

सारी जिंदगी मैं समाज सेवा के काम में रही हूं. झारखंड में जनता के लिए काम करने के चलते मेरा हमेशा सरकार, माफिया और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों से सीधा टकराव हुआ है. व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है और इस बदलाव के लिए आपको व्यवस्था के भीतर ही दाखिल होना होगा अब समय आ गया है कि हम जैसे लोग जो जनता के लिए काम करते हैं, न सिर्फ वह काम जारी रखें बल्कि लोकसभा में भी जाएं और वहां ऐसे कानून बदलें जो आदिवासियों का हक मारने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

आज हर तरफ विकास की बात होती है. लेकिन इन कथित विकास परियोजनाओं में ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार का बोलबाला है. अगर एक कुआं बनने के लिए तीन-चार लाख रु आते हैं तो उनमें से योजना तक सिर्फ डेढ़ लाख रु ही पहुंचते हैं. बाकी स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता, जिला कलेक्टर, विधायक और संबंधित मंत्री खा जाते हैं. आधे से ज्यादा पैसा तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रहा है. आदिवासियों का हक मारा जा रहा है.

सरकार के लिए विकास का मतलब है किसानों और आदिवासियों को विश्वास में लिए बिना राज्य के संसाधनों का दोहन करना. जब स्थानीय लोग विरोध करते हैं तो उन पर माओवादी होने का ठप्पा लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है.

Pages: 1 2 Single Page

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 6 Issue 8, Dated 30 April 2014)

Type Comments in Indian languages