सूरत में आग ने छीन लिए 20 युवा जीवन

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सूरत के तक्षशिला आर्केड में हुए भंयकर अग्निकांड में 20 बच्चों की जान चली गई। यह गिनती और अधिक होती यदि एक डिज़ाइन संस्थान के युवा निदेशक ने अपनी जान की परवाह किए बगैर सात बच्चों का न बचा लिया होता। इसी आदमी ने कोचिंग सेंटर के स्टाफ की भी जान बचाई। इस प्रयास में वह खुद घायल हो गया। उसके सिर पर गहरी चोट आई है और एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

सूरत पुलिस ने इस परिसर को बनाने वालों हर्षल वकेरिया और जिग्नेश और कोचिंग सेंटर के मालिक भार्गव भूटानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। गुजरात के मुख्य सचिव डाक्टर जेएन सिंह के मुताबिक इस अग्निकांड मामले मेें कोचिंग सेंटर चलाने वाले को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही लापरवाही बरतने के आरोप में ‘फायर विभाग’ के दो अधिकारी भी निलंबित कर दिए गए हैं। सिंह ने बताया कि घटना के बाद पूरे गुजरात में 9395 भवनों को प्रारंभिक निरीक्षण के बाद कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें तीन दिन में जवाब देना है।

मुख्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक सूरत में 1123 कोचिंग सेंटरों को नोटिय दिए गए है। उन्हें अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। इस बीच यह बात सामने आई है कि कोचिंग सेंटर में पढऩे वाले छात्र टायर की सीटों पर बैठते थे। इस कारण आग फैलने में आसानी हुई और वह तेजी से फैली। इसी वजह से छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इसके अलावा वहां और भी कई ऐसी चीज़ें थी जो जल्दी आग पकड़ती हैं।

हादसों का इतिहास

देश में हादसों के मामलों में आग लगने के मामले तीसरे नंबर पर आते हैं। जब कोई बड़ा हादसा होता है तो कुछ दिनों तक हो-हल्ला होने के बाद सभी कुछ सामान्य सा हो जाता है। तीन साल पूर्व आपदा प्रबंधन में एमए कर रहे पंजाब विश्वविद्यालय के एक छात्र ने चंडीगढ़ सेक्टर-22 की मार्किट पर एक रिपोर्ट तैयार की थी। उसके अनुसार यदि वहां आग लग जाए तो सैकड़ों इंसानों की जि़ंदगी जा सकती है। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक सेक्टर-22 के जो शोरूम सेक्टर-17 के सामने है उनकी ‘बेसमेंटस’ में हज़ारों की संख्या में छोटे-छोटे बूथ खुले हुए हैं। इनमें ज़्यादातर दुकानें मोबाइल फोन या फोटोग्राफी सामग्री की हैं। हर बेसमेंट में 35 से 40 बूथ हैं। अंदर जाने और बाहर आने का एक ही रास्ता है आपातकाल की स्थिति में वहां से निकलना संभव नहीं। इसके साथ ही पूरी मार्किट में जो स्थान आपातकाल में काम आने वाली गाडिय़ों के लिए आरक्षित हैं वहां पार्किंग वाले और दुकानदार अपनी गाडिय़ां फंसा कर रखते हैं।

इसी प्रकार देश के विभिन्न शहरों में यह आम देखने को मिलता है। यही कारण है कि जब भी कहीं कोई बड़ी घटना होती है तो उसमें जान-माल का भारी नुकसान होता है।