सिंह बनाम सिंह फोर्टिस विवाद और गहराया

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छोटे भाई शिवेंद्र ने बडे भाई मलविंदर सिंह के खिलाफ एक मुकदमा दायर कर दिया है। उन्होंने उस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनकी पत्नी के जाली दस्तखत किए हैं। फोर्टिस विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और यह चर्चा की शिविंदर यह शिकायत वापिस ले रहे हैं, ऐसे में एक कारपोरेट घराने में छिड़े झगड़े का जायजा ले रहीं हैं सुमन

गंभीर जालसाजी की जांच करने वाला दफ्तर सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) के वित्तीय अधिकारी फोर्टिस में अनियमितताओं की पड़ताल में जुटे हैं। सिंह भाइयों पर आरोप है कि उन्हें डाएची सैक्यो जापान की कंपनी को तकरीबन पांच सौ मिलियन डालर की रकम देनी है जो उन्होंने 2008 में रैनबैक्सी लेबोरेटरी बेच कर पाई थी। इस रकम को लेकर उन पर फ्रॉड का मामला बना है।

 दरअसल महीनों बंद कमरों में हुए झगड़े-फसाद के बाद अब यह मामला सार्वजनिक हुआ है। हालांकि तमाम बढ़े-बड़े व्यापारिक घरानों में इन दिनों ऐसे फसाद होते दिखते हैं। छोटे भाई शिवेंद्र ने बड़े भाई मलविंदर सिंह और पारिवारिक दोस्त सुनील गोधवानी पर आरोप लगाया है कि इन लोगों ने फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के हितों की अनदेखी की है। अपनी 43 पेज की याचिका में शिवेंद्र का आरोप है कि उसकी पत्नी अदिति सिंह जो आरएचसी होल्डिंग के प्रबंध निदेशक पद पर थी उसके जाली दस्तखत बना कर हेराफेरी की गई। ऐसे उदाहरण मिलते हैं कि याचिका कर्ता नंबर तीन (अदिति सिंह) को बोर्ड की बैठक में मौजूद दिखाया गया जबकि वह विदेश में थी। कुछ साल बाद परिवार को कोई भी करीबी यह मानने को राजी नहीं था कि किसी कारपोरेट हाउस में लेन देन का यह स्तर होगा। जब फोर्टिस का सौदा हुआ तो यह बताया गया कि भारतीय मरीज़ों की देखभाल उद्योग का खासा बड़ा अधिग्रहण है। इसके तहत 45 सौ करोड़ की फोर्टिस-आईएचएच सौदे से प्रतियोगिता ही बढ़ेगी। आईएचएच फोर्टिस समूह के अस्पताल देश के बड़े अस्पतालों में होंगे। जो देश के सबसे बड़े अस्तपतालों के समूह में एक होंगे। उदाहरण के लिए अपोलो कुल दस हजार बिस्तर का अस्पताल है। इसके सहयोगी मैक्स हेल्थकेयर के पास 14 अस्पताल हैं। जिसके पास कुल 2500 बिस्तर हैं। इसकी तुलना में इस समझौते के बाद आईएचएच 34 अस्पतालों को नेटवर्क मिलेगा साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी पंहुच होगी। अभी तक इन तमाम सुविधाओं के साथ 46 सौ बिस्तर की व्यवस्था है। जबकि आईएचएच की एशिया के कई देशों में खासी मौजूदगी है। नौ देशों में इसके अस्पताल हैं और दस हजार बिस्तर हैं। भारत में भी इसकी अच्छी मौजूदगी है। फिलहाल यह भारत में पांच शहरों में है और सात अस्पतालों का इसका अपना नेटवर्क है। हालांकि बिस्तर 1600 ही हैं।

किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि हालात इतने बेकाबू हो जाएंगे। तीन पेज के एक दस्तावेज में शिवेंद्र सिंह ने कहा, ‘मैंने मलविंदर सिंह सुनील गोधवानी के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में कुप्रबंध आरएचसी होल्डिंग, रेलिगेयर और फोर्टिस में करने के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शिवेंद्र सिंह ने कहा ‘मैं खामोशी से देखता रहा कि जिस संगठन को मैंने ही स्थापित किया वह उस स्तर पर पहुंच गया जहां उसे नीलाम करने के सिवा कोई चारा नहीं था। मेरा परिवार और खुद मैं अपने ही विरासत से बाहर कर दिए गए थे। हमारे पैसों और मेरी व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग गए थे।

मीडिया के लगभग सभी दफ्तरों में भेजी अपनी विज्ञप्ति में शिवेंद्र सिंह ने कहा है कि, ‘दो दशक तक वे और उनके भाई तो एक दूसरे से बेहद करीब थे’। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की शाखा में दायर अपनी याचिका में सिंह बंधुओं में छोटे भाई शिवेंद्र ने बड़े भाई मलविंदर (45 वर्ष के) और रेलिगर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष और सुनील गोधवानी पर आरोप लगाया कि इन लोगों ने कंपनी को कजऱ् के शिंकजे में डाल दिया है और अपने क्रेडिटर्स और शेयर होल्डर के हितों से खिलवाड कर रहे हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि मलविंदर ने अदिति सिंह के जाली दस्तखत आरएचसी होल्डिंगस प्राइवेट लिमिटेड के दस्तावेजों में बनाए। इतना ही नहीं इन्होंने ऑस्कर इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में ऐसा ही किया। अदिति सिंह शिवेंद्र की पत्नी है। आरएचसी होल्डिंगस प्राइवेट लिमिटेड और ऑस्कर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड की सयुंक्त तौर पर वित्तीय सेवाओं की फर्म है। रेलिगर एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अस्पताल समूह फोर्टिस हेल्थकेया लिमिटेड।

इस याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि मलविंदर और गोधवानी ने अपने पदों का बेजा इस्तेमाल करके अवैध तौर पर वित्तीय लेनदेन और कई तरह के कुप्रबंध आरएचसी में किए जिससे आरएचसी और उसकी शाखाओं में खासा नुकसान हुआ और खजाना भी खत्म हुआ।

शिवेंद्र ने एनसीएलटी से अनुरोध किया है कि मलविंदर और गोधवानी ने आपस में मिलीभगत करके कंपनी के हितों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने एनसीएलटी से अपील की है कि वह मलविंदर मोहन सिंह और सुनील गोधवानी की उस कमाई का पता लगाए जिसके कारण याचिकाकर्ता को और आरएचसी होल्डिंग्स को नुकसान हुआ। यह भी अनुरोध किया गया कि एनसीएलटी मलविंदर और गोधवानी को आरएचसी होल्डिंग्स के खजाने को वापस लौटाएं जो उनकी गैर कानूनी हरकतों के चलते खत्म हो गया है साथ ही अपनी पूंजी, बैंक -खाते और पूरी माली हालत का ब्यौरा दें। एनसीएलटी से यह घोषणा करने को कहा गया है कि मलविंदर और गोधवानी ने आपस में मिलकर अवैध वित्तीय लेनदेन किया। शिवेंद्र की पत्नी के जाली दस्तखत बनाए। और कंपनी को कर्ज के फंदे में डाल दिया। मलविंदर और गोधवानी ने अवैध वित्तीय लेनदेन और कुप्रबंध के जरिए यह सब किया और आरएचसी और दूसरी कंपनियों का खजाना खाली कर दिया।

इजेंक्शन की मांग

यह याचिका आरआरजी एंड एसोसिएट्स की कानूनी फर्म के जरिए एनसीएलटी को दायर की गई है। उसमें यह चाहा गया कि यह मलविंदर को निर्देश दे कि गैर कानूनी तौर पर फोर्टिस हेल्थकेयर और रेलिगेर एंटरप्राइजेज से लिए गए फंड को वापस किया जाए। साथ ही एनसीएलटी से मलविंदर और गोधवानी को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे कहीं और किसी संपति में रुचि न दिखाए जिससे उससे रिकवरी में कठिनाई आए। अंतरिम राहत की अपील करते हुए शिवेंद्र ने इजंक्शन की मांग की है जिससे आरएचसी होल्डिंग्स की शेयर होल्डिंग पूरे मामले की सुनवाई पूरी होने तक यथास्थिति रहे। शिवेंद्र ने आरएचसी होल्डिंग्स के बोर्ड के डायरेक्टरों पर भी ‘स्टेटस को’ चाहा है। यह याचिका कंपनी एक्ट 2013 की धारा 214, और 244 के तहत दायर की गई है।  अपने 43 पेज की याचिका में शिवेंद्र ने अपनी पत्नी अदिति सिंह जो आरएचसी होल्डिंग्स में प्रबंध निदेशक थी उनके जाली दस्तखत करने का आरोप भी लगाया है। याचिका कर्ता ने बताया है कि याचिका नंबर तीन (अदिति सिंह) दरअसल विदेश में थीं। जब यह सब हुआ। ध्यान रहे आरएचसी होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड एक गैर-बैंकिग कंपनी है। जिसे सिंह बधुओं का परिवार संभालता है। अभी इस फर्म के प्रबंध निदेशक मलविंदर सिंह हैं

 दूसरे सौदों का भूत

ऐसा लगता है कि फोर्टिस का भूत जो दोनों भाइयों पर अब भी सवार है। डाएची ने दोनों भाइयों से रुपए 3,500 करोड़ मात्र के लिए मामला दर्ज कर रखा है और सिक्यूरिटीज एंड एक्स्चेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) फोर्टिस और रेलिगेर की फोरेंसिक ऑडिट करा रही है। इस साल के शुरू में सिग्युलर गफ एंड कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में सिंह बंधुओं पर आरोप लगाया था कि इन लोगों ने रेलिगेर से फंड की हेरा-फेरी की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सिंगापुर आरबिट्रेशन ट्रिब्यूनल के फैसले को उचित माना जिसमें सिंह बंधुओं पर रुपए 3500 करोड़ मात्र को छिपाने और डाएची सैंक्यों को गुमराह करने का आरोप लगाया है।