सवालों को लांघती राजनीति | Tehelka Hindi

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सवालों को लांघती राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बाद कहा था कि,Óतेलंगाना को पृथक राज्य बनाने की मंजूरी देकर कांग्रेस ने अपना चुनावी स्वार्थ साधा और जल्दी की। यह मोदी का कहना आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू द्वारा ’भाजपाÓ से गठबंधन तोड़ लेने की धमकी के परिपेक्ष्य में तुष्टीकरण का ही वाक्य था।

नरेंद्र मोदी जैसे दूरदर्शी प्रधानमंत्री ने इस बीज़ वाक्य के जरिए भारतीय जनता पार्टी की तेलंगाना की लंबी राजनीति परंपरा को समर्थन देने की बात नकार दी। जिसके तहत भाजपा के सत्ता में आते ही सौ दिनों के भीतर तेलंगाना को पृथक राज्य बनाने की आडवाणी -घोषणा अमल में लाने की बात कही। उधर सुषमा स्वराज ने संसद में तेलंगाना के उग्र छात्र आंदोलन को खुला समर्थन दिया।

‘तेलंगानाÓ जनता का आंदोलन था। इंदिरा गांधी के ज़माने में बंदूक के बल पर इसे दबा दिया गया था। हाल ही में तेलंगाना आंदोलन के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में नई चुनौतियों को स्वीकार कर आग के मैदान में उतरा था, और सफल हुआ। आज के चंद्रशेखर राव तेलंगाना के मुख्यमंत्री हैं।

उन्हें पता था कि चंद्रबाबू के मोह में मोदी तेलंगाना जन आंदोलन के इतिहास को नकार कर उसकी स्थापना में कांग्रेस की दया को आज आधार बना रहे हैं। यही आक्रोश और वजह राव ने अपने भाषण में जताया भी था। जिस पर भाजपा ने हंगामा किया। दरअसल तेलुगु भाषा में करीम नगर में जहां वे बोल रहे थे वहां ’वाडूÓ (वो) ईडू (मे) वाडू यानी मोदी के प्रति संबोधन में प्रयुक्त शब्द और ईडू अर्थात कांग्रेस के प्रति उदबोधन शब्द केसीआर के मुख से जन सभा में निकले।

मुख्यमंत्री राव का कहना था कि तेलंगाना के लिए ’वोÓ क्या कर देगा और ये क्या करेंगी? भारतीय जनता पार्टी ने इसे अपने दिल पर पत्थर रख कर मुद्दा बनाया, हालांकि मोदी के तेलंगाना नकार के बाद भीतरी रूप से बगारू,दत्तात्रेय, किशन रेड्डी, राजा सिंह, लक्ष्मण राव आदि भाजपा नेता नाराज़ थे।

केसीआर को तेलंगाना जनता का आज समर्थन प्राप्त है। वे जनता की ओर से ही बोल रहे थे। ऐसा टीआरएस का कहना था। लेकिन नलगोडा में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह द्वारा पार्टी के हित में आगामी चुनावी सेंध लगाने के बाद टीआरएस में हलचल का पैदा होना स्वाभविक है क्योंकि टीआरएस ने स्थानीय एमआईएम पार्टी के सहयोग से यह स्वप्न पाल रखा है कि ज्योति बसु की तजऱ् पर केसीआर का राज 25 वर्षों तक अडिग़ और अचल रहेगा और असदुद्दीन ओवैसी से आपसी सहयोग भी जारी रहेगा ।

के चंद्रशेखर राव ने ’उने इने अरे तूरेÓ की राजनीति के चलते भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी का अपमान किए जाने की माफी की मांग पर अपनी पार्टी द्वारा जवाबी हमले जारी रखें। मुख्यमंत्री के पुत्र केटीआर द्वारा गलती-स्वीकार की स्थिति के बावजूद यह मुद्दा छाया रहा।

दरअसल आज संसद से लेकर जन सभाओं तक राजनीतिक भाषणों की भाषा मर्यादा की सीढिय़ों से उतर रही है चाहे प्रधानमंत्री द्वारा रेणुका चौधरी के प्रति व्यक्त टिप्पणी हो, या केसीआर द्वारा व्यक्त अपने शब्द। कुल मिलाकर यह विवाद सिमट गया है किंतु इसके गर्भ से जो मतभेद उभरे हैं उससे आज के चंद्रशेखर राव वैकल्पिक तीसरे मोर्चे की संभावना से जुड़े हैं। असदुद्दीन ओवैसी द्वारा आनन फानन में तीसरे मोर्चे की बात छेडऩे और केसीआर को उसके अध्यक्ष की पेशकश करने से राजनीति गर्मा गई है। ममता और अन्य राष्ट्रीय नेताओं ने भी अपना समर्थन के चंद्रशेखर राव को देने का ऐलान किया है।

इधर इस बात के तूल पकडऩे पर अनुसूचित जनजातियों, आदिवासियों और सभ्रांत जातियों के प्रतिनिधियों ने ’प्रगति भवनÓ मे जाकर हज़ारों की संख्या में मुख्यमंत्री राव से भेंट की और उन्हें अपना समर्थन बिना शर्त देने की घोषणा की।

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 10 Issue 07, Dated 15 April 2018)

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