सर्वोच्च न्यायलय का राजनीति में अपराधियों पर लगाम के लिए बड़ा आदेश,  वेबसाइट पर करनी होगी उम्मीदवारों की जानकारी साझा

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सर्वोच्च न्यायालय से राजनीति में सुचिता की बड़ी पहल हुई है। राजनीति में आपराधिक छवि के लोगों की बढ़ती हिस्सेदारी पर गुरूवार को गहन चिंता व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने तमाम राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट पर सभी उम्मीदवारों की जानकारी साझा करें। अदालत ने आदेश दिया कि सभी राजनीतिक दलों को उम्मीदवार घोषित करने के ७२ घंटे के भीतर चुनाव आयोग को इसकी जानकारी देनी होगी।
सर्वोच्च अदालत का यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। इस आदेश के मुताबिक अब प्रत्याशी पर दर्ज सभी आपराधिक मामले, ट्रायल और उम्मीदवार के चयन का कारण भी राजनीतिक दलों को बताना होगा। राजनीतिक दल को ये भी बताना होगा कि आखिर उन्होंने एक अपराधी को क्यों अपना प्रत्याशी बनाया। यह याचिका एक वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है।

इस आदेश के मुताबिक राजनीतिक दलों को घोषित प्रत्याशी की जानकारी स्थानीय अखबारों में भी छपवानी होगी और राजनीतिक दलों को उम्मीदवार घोषित करने के ७२ घंटे के भीतर चुनाव आयोग को इसकी जानकारी देनी होगी।

अभी यह साफ़ नहीं है हालांकि, इस आदेश के बाद इस बात की पक्की संभावना लग रही है कि यदि अदालत के आदेश का पालन राजनीतिक दलों ने नहीं किया तो यह अदालत की अवमानना मानी जाएगी। अतीत में राजनीतिक दल इस तरह के आदेशों को हलके में लेते रहे हैं जिससे राजनीति में अपराधियों की संख्या बढ़ती गयी है।

याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय के मुताबिक अगर कोई भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल इन निर्देशों का पालन नहीं करेगा, तो उसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। अगर किसी नेता या उम्मीदवार के खिलाफ कोई मामला नहीं है और कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं है तो उसे भी इसकी जानकारी देनी होगी।