शीला दीक्षित पंच तत्व में विलीन

नम आँखों से हज़ारों लोगों ने दी प्रिय नेता को अंतिम विदाई

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पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का रविवार शाम निगम बोध घाट पर हजारों नम आँखों    बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बेटे संदीप दीक्षित ने अपनी मान की पार्थिव देह को अग्नि दी। उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े।
सुबह उनकी पार्थिव देह कांग्रेस मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखी गई। यहां सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोनिया ने कहा – ”वह मेरी बड़ी बहन और दोस्त थीं। हमेशा मुझे उनका समर्थन मिला।” याद रहे शनिवार दोपहर राजधानी के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में कॉर्डियक अरेस्ट से दिल्ली को विकास की नई ऊंचाई तक ले जाने वालीं शीला दीक्षित का निधन हो गया था। वे १५ साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने १० जनवरी को उन्हें दिल्ली अध्यक्ष की कमान सौंपी थी।
पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शनिवार देर शाम पूर्वी निजामुद्दीन स्थित दीक्षित के आवास पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत कई नेता उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में दो दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा – ”शीलाजी के निधन से दुखी हूं। वह मुझे बहुत प्यार करती थीं। दिल्ली और देश के लिए उन्होंने जो किया उसे हमेशा याद रखा जाएगा। वह पार्टी की बड़ी नेता थीं।” राहुल गांधी, जो इस समय अमेरिका में हैं, ने उन्हें कांग्रेस की बेटी बताया। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा – ”कुछ दिन पहले ही शीला जी से मिला था। वह मेरी मां जैसी थीं।”
शीला दीक्षित का जन्म ३१ मार्च, १९३८ को कपूरथला (पंजाब) में हुआ था। २०१४ में उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने २५ अगस्त, २०१४ को इस्तीफा दे दिया था। वे इस साल उत्‍तर-पूर्व दिल्‍ली से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं लेकिन भाजपा के मनोज तिवारी से हार गईं थीं।
शीला यूपी की राजनीति में भी सक्रिय रहीं लेकिन लगातार चार लोकसभा चुनाव हारने के बाद १९९८ में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें दिल्ली की जिम्मेदारी दी। शीला ने चुनाव में पार्टी की कमान संभाली और चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने २०१३ तक तीन कार्यकाल बतौर मुख्यमंत्री पूरे किए। शीला ने राजीव सरकार में तीन साल केंद्रीय मंत्री पद भी संभाला।