शिक्षा केंद्रों की स्वायत्तता या बाजारीकरण | Tehelka Hindi

राष्ट्रीय A- A+

शिक्षा केंद्रों की स्वायत्तता या बाजारीकरण

तहलका ब्यूरो 2018-04-15 , Issue 07 Volume 10

केंद्र की भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार ने देश के 62 माने हुए शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता का तमगा देते हुए इनकी अचल संपत्तियों के लिहाज से अब इनका पूरी तौर पर निजीकरण करने का फैसला लिया है। हालांकि स्वायत्तता का मतलब यह नहीं है कि अब इनमें ज़्यादा वैचारिक आज़ादी होगी, शोध के लिए अपार फंड होगा और राज्य व सरकारी नियंत्रण कम होगा।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह घोषणा करके यह ज़रूर जता दिया कि बाधाओं के बाद भी वे नीतियां अमल में ला सकते हैं। अब जिन्हें पढऩा है वे पैसा खर्च करें। मुफ्त में कुछ नहीं।

विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता होगी लेकिन एकेडेमिक आज़ादी का अभाव रहेगा। सरकारी शिक्षण संस्थानों में पहले संवैधानिक आदेशों के तहत शिक्षण व्यवस्था थी, अच्छे नागारिक बनाने का संकल्प था, आपस में खुला विवाद होता था। छात्र-छात्राओं को कम लागत में अच्छी शिक्षा सुलभ होती थी।

लेकिन अब स्वायत्त शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं को देश, धर्म, संस्कृति से लगाव रखना होगा। बाजार की ज़रूरतों के अनुसार ही खुद को वे योग्य बनाएंगे। एकेडेमिक ऑटोनॉमी के तहत ऐसे शोधों की संभावना बढ़ेगी जैसे सरकार की नई नीतियां और उनका प्रभाव या नई सरकारी नीतियों का बाजार पर असर आदि जैसे ढेरों विषय। यानी अब कारपोरेट उद्योग और एकेडेमिक विभागों में ज़्यादा तालमेल होगा। सही तौर पर स्वायत्तशासी यूनिवर्सिटी वह होगी जहां छात्र और अध्यापक देश विरोधी न हों सरकारी नीतियों का विरोध न करते हों और देशभक्ति संबंधी नीतियों को अमल में लाएं।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने 20 मार्च को स्वायत्तता का ऐतिहासिक घोषणा पत्र जारी किया। इसके पहले तकरीबन एक महीने पहले गजट नोटिफिकेशन किया गया था। जिस का शीर्षक था यूजीसी कैटागराइजेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज फार ग्रांट ऑफ ग्रेडेड ऑटोनॉमी रेगुलेशंस 2018और कन्फर्मेंट ऑफ ऑटोनॉमस स्टेट ऑफ कॉलेजेज रेगुलेशंस 2012 इन रेगुलेशंस की तुलना में नई स्वायत्तता की बात कहीं अलग है। रेगुलेशंस का ज़ोर ऐसी नीति पर है जिसके तहत गुणात्मक शिक्षा में फंड जाएं।

जिन 62 विश्वविद्यालयों को स्वायत्त बनाने की बात की जा रही है उनमें जेएनयू, बीएचयू, और एएमयू प्रमुख हैं। इन सभी का परिसर काफी लंबा-चौड़ा है जिस पर अर्से से बाजार की निगाहें हैं। स्वायत्तता शब्द के बहाने देश की जनता को भ्रम में रखने की पहल केंद्र सरकार ने की है। मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इन्हें स्वायत्तता प्रदान करना इनकी अर्थव्यवस्था को उदार बनाना है। इन्हें फिर शिक्षा में अपना स्तर और ऊँचा करने के लिए यूजीसी(यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) का मुंह नहीं देखना होगा।

Pages: 1 2 Single Page

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 10 Issue 07, Dated 15 April 2018)

Comments are closed