वित्त मंत्री सीतारमण के पति की मोदी सरकार को सलाह – मनमोहन और राव की आर्थिक नीतियों से सीखें

अर्थशास्त्र में नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने भी अर्थव्यवस्था को डगमगाती बताया

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एक तरह से भाजपा के लिए बड़ी फ़ज़ीहत के रूप में मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आर्थिक जानकार और बुद्धिजीवी पति परकला प्रभाकर ने मोदी सरकार को सलाह दी है कि नेहरू की आलोचना करने की जगह वो मनमोहन सिंह और नरसिंह राव की आर्थिक नीतियों से सीख लेकर अभी भी देश की आर्थिक स्थिति को संभाल सकती है। उधर अर्थशास्त्र में सोमवार को नोबेल जीतने वाले भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को डांवांडोल बताया है।

प्रभाकर ने मोदी सरकार को यह नसीहत अपने एक लेख में दी है। याद रहे राव जब प्रधानमंत्री थे तो इकॉनमी के गुरु माने जाने वाले मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे।  प्रभाकर के इस आलेख ने भाजपा को बैकफुट पर दाल दिया है। कुछ जानकारों का कहना है कि इस ब्यान से भाजपा में बेचैनी फ़ैली है।

प्रभाकर ने अपने लेख में कहा – ”भाजपा ने नरसिम्हा राव सरकार की नीतियों को न तो खारिज किया और न ही उसे चुनौती दी। अगर सरकार उनकी (राव-मनमोहन) नीतियों को अपना ले तो अभी भी पीएम मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिल सकती है।”

वित्तमंत्री के पति का यह ब्यान तब आया है जब देश की आर्थिक नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं। खुद वित्त मंत्री तीन बार प्रेस कांफ्रेंस करके आर्थिक मंदी से उबरने के लिए कई घोषणाएं कर चुकी हैं। यह अलग बात है कि इसके बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार के कुछ ख़ास संकेत नहीं दिखे हैं।

उधर परकला प्रभाकर ने एक अंगरेजी अखबार में अपने लेख में मोदी सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की तरफ से अपनाए गए आर्थिक मॉडल को अपनाने की सलाह दी है। प्रभाकर ने साल १९९१ में बिगड़ी अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का भी जिक्र किया है।

एक तरह से मोदी सरकार की आर्थिक सोच पर सवाल उठाते हुए प्रभाकर ने कहा – ”भाजपा अपनी स्थापना के बाद से अपना कोइ आर्थिक ढांचा प्रस्ताव नहीं ला पाई।  वह सिर्फ नेहरूवादी आर्थिक ढांचे की आलोचना करती रही। भाजपा ने हमेशा यह नहीं-यह नहीं की नीति अपनाई जबकि उसकी अपनी नीति क्या है, उसके बारे में कभी कुछ नहीं कहा।”

अपने आलेख में प्रभाकर ने कहा कि शायद भाजपा के वर्तमान नेतृत्व भी इससे अवगत है तभी चुनावों के दौरान पार्टी ने इस बात का ख्याल रखा कि अर्थव्यव्सथा को लेकर जनता के सामने कुछ भी पेश न करे। इसके स्थान पर पार्टी ने बुद्धिमानी से, एक राजनीतिक, राष्ट्रवादी और देश की सुरक्षा का मंच चुना।” याद रहे २०१९ के लोकसभा चुनाव में ”खतरे” को भांपते हुए भाजपा ने असली मुद्दों की जगह भावनात्मक ”उग्र राष्ट्रवाद” का मुद्दा अपना लिया था और जबरदस्त जीत हासिल की थी।

इस बीच सोमवार को अर्थशास्त्र का नोबेल जीतने वाले अभिजीत बनर्जी ने भी  भारतीय अर्थव्यवस्था को डगमगाती स्थिति में बताया है। बनर्जी ने कहा कि निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर वह आश्वस्त नहीं हैं।

अभिजीत ने देश की आर्थिक स्थिति पर कहा – ”मौजूदा आंकड़े देखने के बाद निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था में सुधार होने को लेकर आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता है। पिछले पांच-छह साल में हमने कम-से-कम कुछ विकास तो देखा। लेकिन अब वह भरोसा भी खत्म हो गया।”