राहुल ने जनता का दर्द साझा किया राजस्थान में उमड़ा गजब जन सैलाब

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में अब पूरी विश्वसनीयता के साथ कहा जा सकता है कि,’वे एक मंजे हुए परिपक्व राज नेता हो चुके हैं। जिन्हें कभी कोई अधकचरा नेता बताते हुए उपेक्षित करना पसंद करता था। टीवी और मीडिया में बैठे हुए अगुआ पत्रकार उन्हें संजीदगी से लेने से कतरा रहे थे, लेकिन मंगलवार 9 अक्टूबर को धोलपुर जिले के बयाना रोड शो के बाद आयोजित सभा में जिस तरह दमदार नेता की तरह जमकर बोले,’उसका अकाट्य सत्य समझे ंतो राहुल गांधी एक ऐसे प्रखर और प्रचंड नेता के रूप में उभरे है जिनका कोई सानी नहीं है।’’ राहुल गांधी ने बेहद तीखी बोली ओैर जुमलेबाजी के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनकी टीम और मुख्यमंत्री वसुंधरा सरकार पर जमकर हमले किए। कांग्रेस के सुप्रीमों राहुल गांधी यह कहते हुए अपने राजनीतिक प्रतिद्वंन्दियों की तुलना में एक कद्दावर नेता नजर आए कि,’मोदी सरकार ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में झूठी घोषणाओं, जुमलेबाजी, किसानों, मजदूरों,दलितों,युवाओं महिलाओं और आदिवासियों के हितों की योजनाओं के शटर गिरा दिए और जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा उद्योगपतियों के जेबों मे डालने और उन्हें विदेश भागने में मदद करने के अलावा कोई काम नहीं किया। विश्लेषकों का कहना है कि सबसे बड़े राजनैतिक टकराव की तारीखें तय होने के बाद अपनी पहली रेली में राहुल गांधी ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत तीन राज्यों में जमीनी पकड़ मजबूत करने की नई नीति गढऩे की कोशिश की है। उनकी सभा में उमड़ती भीड़ का सैलाब इस बात का पुख्ता सुबूत है कि वे लोगों के मानस पर जबरदस्त ढंग से छा गए हैं।

राहुल की रेली से वसुंधरा के गृह क्षेत्र की 23 सीटों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि इसके जवाब में भाजपा मोदी रेलियां आयोजित करवाकर 34 सीटों पर असर डालने की तैयारी में है। धोलपुर में राहुल गांधी की सभा का आयोजन पिछले दिनों अजमेर में हुई मोदी की सभा का जवाबी वार था। इसकी अंर्तकथा समझे ंतो धोलपुर वसुंधरा का गृह क्षेत्र है, जबकि अजमेर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट का निर्वाचन क्षेत्र है। पिछले चुनावों में जहां राहुल और मोदी अपनी-अपनी दलीय हदों में प्रचार की दृष्टि से तीसरे नंबर पर थे, लेकिन इस बार प्रचार में दोनों ही सबसे अव्वल है। कांग्रेस में मुख्य रूप से दारोमदार तीन बड़े चेहरों राहुल गांधी, अशोक गहलोत और सचिन पायलट पर रहेगा। मोदी के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, वसुंधरा राजे, राजनाथ सिंह, प्रकाश जावेडकर, ओमप्रकाश माथुर, राज्यवर्द्धन सिंह और गजेन्द्र सिंह शेखावत मुख्य भूमिका में है। भाजपा की टीम से इस बार कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी गायब है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है और यह 11 दिसम्बर को तय हो जाएगा कि, पांचों राज्यों में कौनसी पार्टी सरकार बनाएगी? फिलहाल तो भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दल लोगों की आकांक्षाओं के बोझ से दोहरे हो रहे हैं। भले ही भाजपा योजनाओं और कार्यक्रमों का ऐसा भानुमति का पिटारा खोल रही है, लेकिन लोगों के सवालों की झड़ी में उनके दावे दब जाते हैं, जब लोग पूछते हैं कि,कहां दिए रोजगार बताओ? तो वसुंधरा सरकार के आगे पैना सन्नाटा खिंच जाता है। विश्लेषक कहते हैं कि ‘स्मृति और इतिहास में बहुत अंतर है। वसुंधरा सरकार इस रहस्य को समझती तो झूठे दावे नहीं करती?

बहरहाल यह भी सच है कि अभी तो जाति-समाज साधने में ही भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व के पसीने छूट रहे हैं। अन्य पिछड़े वर्ग को साधने की कमान भाजपा में अभी प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी के हाथ में है तो कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट दोनों ही ओबीसी वर्ग से होने के नाते, यह जिम्मा संभाल रहे हैं। इस मामले में सबसे बड़ी मुश्किल दोनों ही दलों के समर्थकों के अलग-अलग गुट है और हर गुट दबाव की लाठी लिए खड़ा है और इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल पंजों पर खड़े हैं। भाजपा इस मामले में हर कदम पर पस्ती मे है। जबकि कांगे्रस में महत्वाकांक्षा, प्रतिस्पर्धा और सक्रियता के तत्व समाहित हो गए है।

भाजपा और कांग्रेस दोनो ही पार्टियां ‘अन्नदाता’ का आशीर्वाद लेने के लिए ‘माइक्रो मैनेजमेंट’ में जुट गई है। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व ऐसी टीम तैयार कर रहा है ताकि गांवों में जीरो ग्रांडड से फीड बैक देने के साथ ही कार्यकर्ताओं की समितियों का गठन किया जा सके। कांग्रेस ने बूथ स्तर तक की कार्यकारिणी का गठन कर फीड बैक लेना शुरू कर दिया है जबकि भाजपा में यह काम अमित शाह के दिशा निर्देश पर किसान मोर्चा कर रहा है। कांगे्रस में अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस काम का जिम्मा सांसद नानाभाऊ पटोले को सोंपा है जो भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए हैं। पटोले किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष है। उन्होंने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों को विशेष टास्क सोंपे है। इनमें पूर्ण कर्ज माफी और फसल खराबे का मुआवजा दिलाने के लिए आंदोलन की रणनीति बनाने के निर्देश दिए है। उधर भाजपा किसान संघ से नाराज कार्यकर्ताओं को फिर से मनाने का प्रयास करेगी।

विश्लेषकों का कहना है कि,’सरकार के लिए कामयाबी का पहला पैमाना ठोस इरादे होता है,वसुंधरा सरकार तो इसी घाट पर फिसल गई। मंशाओं की गठरी दिखा देने से क्या होता है, जब कोई काम ही ना हो? आज पंजाब से सटे इलाके श्रीगंगानगर में सियासी संग्राम पानी के सवाल, बवाल और मलाल पर टिका है। भले ही तीसरा विश्व युद्ध होगा या नहीं? अथवा होगा तो वह पानी पर लड़ा जाएगा या नहीं? लेकिन श्री गंगानगर की आबोहवा में बिखरी पानी की कहानियां साफ इशारा करती है कि, यहां सियासी संग्राम पानी पर लड़ा जाएगा। यहां पानी के मुद्दे ने ही नेताओं की नैया पार लगाई है और अब यह चुनावी हथियार के रूप में खड़ा हुआ है? बात की गहराई समझे ंतो जिले के साढ़े तेरह लाख वोटर में से एक तिहाई तो खेती-किसानी करने वाले ही है।

उधर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के महासचिवों, मीडिया प्रमुखों और प्रवक्ताओं को राजस्थान समेत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ चुनाव में छवि के संघर्ष में आक्रामक रुख अपनाने की हिदायत दी है। सूत्रों का कहना है कि,’शाह ने पार्टी प्रवक्ताओं की क्लास लेकर उन्हें कहा है कि चाहे प्रेस कॉफ्रेंस हो अथवा टीवी शो उन्हें राफेल सौदा जैसे विपक्ष के चुनावी मुहिम के मुद्दों पर अहम लक्ष्य याद होने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को ‘चोर’ बताने वाले विपक्ष की आलोचना का मुंह तोड़ जवाब दिया जाना चाहिए। छवि के इस खेल में मीडिया मैनेजमेंट में मास्टर माने जाने वाले नेताओं को आगे किया जाना चाहिए।

एक तरफ अमित शाह प्रतिद्वंदी पार्टी पर गोलंदाजी तैयारी करने के लिए साम-दाम-दंड भेद की नीति पर उतारू है। उधर वरिष्ठ पत्रकार रमण स्वामी की माने तो पार्टी के वरिष्ठ नेता ‘सेल्फ गोल’ करने पर आमादा है? एनडीए सरकार में काम करने वाले मंत्री के रूप में चर्चित नितिन गडकरी तो सीधे-सीधे यह कहते हुए सरकार का चेहरा नोंच रहे हैं कि, ‘मोदी सरकार झूठे बयानो ंऔर जुमलों पर बनी थी। उनका कहना था 2014 के चुनावी अभियान में हमने सिर्फ बड़े बड़े वायदे तो किए लेकिन यह बिल्कुल नहीं सोचा कि पूरे नहीं होने की स्थिति में लोग जवाबतलबी करेंगे तो हम क्या कहेंगे? दिलचस्प बात है कि भाजपा के प्रवक्ता गडकरी की इस आत्मवंचना को खिसियाते हुए ‘मजाक’ कह कर रह जाते हैं? लेकिन संभवत: प्रवक्ता इस बात से बेखबर रहे होंगे कि कुछ अर्सा पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी यही कह कर हटे थे कि,’चुनावी माहौल में कह दी जाती है ऐसी बातें? गडकरी का ‘सेल्फ गोल’ चाहे इरादतन था अथवा असावधानीवश कही गई बात? लेकिन इसने कांग्रेस के घाव पर मरहम छिड़कने का मौका तो दे ही दिया। नतीजतन राहुल गांधी ने ‘टृवीट’ किया कि,’सही फरमाया, जनता भी यही सोचती है कि सरकार ने लोगों के सपनों और उनके भरोसे को अपने लाभ का शिकार बनाया।’ भाजपा के सुब्रह्मण्यम स्वामी की आलोचना तो मजाक नहीं थी, जिन्होंने अमेरिका के एक ‘न्यूज नेटवर्क को दिए गए विस्तृत इंटरव्यू में बड़ी बेबाकी से कहा था, भारत की आर्थिक स्थिति अत्यंत भयावह है। उन्होंने इसके लिए मोदी, अरूण जेटली, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय को दोषी ठहराया। स्वामी ने यहां तक कहा कि, पी.वी. नरसिहराव के कार्यकाल में जो प्रगति हुई थी, वो किसी भी सरकार की तुलना में अद्वितीय थी। उन्होंने कहा कि,’जेटली ने कभी अर्थशास्त्र पढ़ा होता तो जानते कि, ‘अर्थ’ का ‘अर्थ’ क्या होता है?

बीकानेर के चुनावी दौरे में राहुल गांधी ने स्थानीय उद्योगपतियों की दुखती नब्ज पर हाथ रखते हुए अपनी संवेदना और दरियादिली का इजहार किया। उद्योगपतियों और युवकों के साथ सहानुभूति रखते हुए राहुल ने अनोखे ढंग से उनकी वेदना को टटोलने के साथ उन्हें पूरी तरह आश्वस्त किया कि,’कांग्रेस की सरकार आने पर उसका मुख्यमंत्री अपने मन की बात नहीं बल्कि उनके मन की बात करेगा और उनकी उम्मीदों को पूरी करेगा। राहुल के इस संवाद ने लोगों का मन जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि,’जो आपने सुना, वो मैंने दिल से कहा….मेरा वादा है, जो कहा है वो पूरा करूंगा।