राजनीतिक बिसात पर पिता-पुत्र | Tehelka Hindi

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राजनीतिक बिसात पर पिता-पुत्र

यह लोकसभा चुनाव छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से ज्यादा उनके बेटों के लिए महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है
प्रियंका कौशल 2014-04-30 , Issue 8 Volume 6

छत्तीसगढ़ में इन दिनों दो शीर्ष राजनीतिज्ञ अपने-अपने बेटों का राजतिलक करने को लालायित हैं. इनमें पहले हैं अजीत जोगी. राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री अपने बेटे अमित जोगी को मरवाही से विधायक बनवाकर एक कदम आगे बढ़ चुके हैं. वहीं दूसरे, राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री रमन सिंह अपने बेटे अभिषेक को सीधे देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा में भेजने की तैयारी कर रहे हैं. दोनों ही पिता लंबी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं और अब अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने के लिए बेकरार हैं.

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रमन के अभिषेक
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह यूं तो इन दिनों लोकसभा चुनाव के प्रचार में व्यस्त हैं. उनके ऊपर राज्य की जिम्मेदारी तो है ही साथ में वे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में भी जाकर चुनावी सभाएं कर रहे हैं. हालांकि उनके करीबी बताते हैं कि इस दौरान भी वे अपने बेटे अभिषेक सिंह (32 वर्ष) की लोकसभा सीट पर नजर रखे रहते हैं. मुख्यमंत्री मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए पल-पल राजनांदगांव लोकसभा सीट पर चल रहे अभिषेक के चुनाव अभियान की जानकारी लेते रहते हैं.

हालांकि अभिषेक का यह पहला चुनाव है लेकिन इसी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह उन्हें अपने पिता से भी अच्छा वक्ता करार दे चुके हैं. जहां तक रमन सिंह की बात है तो उनकी तैयारी देखकर यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि वे भाषण कला के अलावा राजनीति में भी अभिषेक को खुद से आगे देखना चाहते हैं. यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने अपने बेटे के चुनाव प्रचार में सहायता के लिए सबसे युवा, होनहार और तकनीक से लैस कार्यकर्ताओं की टीम काम पर लगाई है. लोधी बहुल सीट होने के कारण कांग्रेस ने जाति कार्ड खेलते हुए राजनांदगांव सीट से कमलेश्वर वर्मा को टिकट दिया है. वर्मा इसे हल और महल की लड़ाई बता रहे हैं. वहीं भाजपा कार्यकर्ता इसे युवा वर्ग की बढ़त बता रहे हैं क्योंकि अभिषेक सिंह के रूप में लंबे समय बाद राजनांदगांव को वाकई ‘युवा’ उम्मीदवार मिल पाया है.

भाजपा आईटी सेल के प्रदेश सहसंयोजक प्रकाश बजाज कहते हैं, ‘ अभिषेक सिंह खुद उच्च शिक्षित हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा भी ली है. अभिषेक की एक खूबी ये भी है कि वे मुख्यमंत्री के बेटे होते हुए भी बहुत जमीनी व्यक्ति हैं.  यही उनकी ताकत है. चुनावी मैनेजमेंट में उन्हें महारथ हासिल है, जो हाल ही में हुए विधानसभा में वे साबित कर चुके हैं.’

भाजपा ने 2009 में यह सीट 1,19,074 वोट के अंतर से जीती थी. लेकिन बीते विधानसभा चुनाव के नतीजे पार्टी के लिए चुनौती पेश करते हैं. राजनांदगांव की आठ विधानसभा सीटों में से कांग्रेस और भाजपा के पास चार-चार सीटें हैं. भाजपा ने राजनांदगांव, डोंगरगढ़, पंडरिया और कवर्धा सीट जीती जबकि कांग्रेस ने खैरागढ़, डोंगरगांव, खुज्जी और मोहला मानपुर सीट जीतीं. लेकिन बावजूद इसके अभिषेक अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई देते हैं. वे कहते हैं, ‘कई बार चुनाव प्रचार के दौरान महिलाएं उन्हें गोंदली (प्याज) देते हुए कहती हैं कि रख लो, इससे तुम्हें लू नहीं लगेगी. बस यहीं मुझे लगता है कि मैं उनका बेटा हूं, उनके बीच का हूं. तब ऐसे में मुझे लगता है कि मेरी जीत सुनिश्चित है.’

मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके बेटे अभिषेक दोनों ही क्रिकेट के शौकीन हैं. दोनों ही राजनीति के विषय पर जितना ज्ञान रखते हैं उतनी ही क्रिकेट पर भी पकड़ है. लेकिन राजनीति और क्रिकेट में कब कौन बाजी मार ले जाए इसका अंदाजा पहले से नहीं लगाया जा सकता. कुछ इसी तर्ज पर यहां भी कहा जा सकता है कि पिता-पुत्र की स्टार जोडी की जुगलबंदी तो काफी अच्छी चल रही है लेकिन राजनांदगांव की घरेलू राजनीतिक पिच पर अंतिम फैसला आने में अभी वक्त है.

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 6 Issue 8, Dated 30 April 2014)

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