यात्रा रोकने की कोशिश भी नाकाम | Tehelka Hindi

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यात्रा रोकने की कोशिश भी नाकाम

2017-07-21 , Issue 14 Volume 14

अमरनाथ यात्रा रोकने की कोशिश पिफर नाकाम रही। ‘यह बाबा की कृपा थी कि गोलियां चल रही थी और तीर्थयात्रियों की बस दौड़ती रही।’ तीर्थयात्रियों की बस मंे घायल उषा ने अपने कानों को हाथ देते हुए, आंखें बंद कर हाथ जोड़ कर कहा ‘अगर कहीं बस रूक जाती तो शायद मैं भी नहीं होती’, अपनी सिसकियों के बीच उसने कहा।
रात साढ़े आठ बजे अमरनाथ से लौटते हुए तीर्थयात्रियों पर चली गोलियों की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर की महिला मुख्यमंत्राी मुफ्रती देर रात अनंतनाग के उस अस्पताल में पहुंची जहां घायल श्र(ालु तीर्थयात्राी भरती थे। इस बस में ज़्यादातर श्र(ालु महिलाएं थी जो बाबा अमरनाथ की यात्रा के बाद लौट रही थीं। अपनी श्र(ा निवेदित करके लौट रही इन
महिला तीर्थयात्रियों के पास कोई हरबा-हथियार भी नहीं था। पिफर भी आतंकवादियों ने इन्हें अपने निशाने पर लिया।
मुख्यमंत्राी मुफ्रती ने कहा, ‘पूरे कश्मीर में ही नही,ं पूरे देश में इस घृणित हमले की निंदा हो रही है। कश्मीर की जनता इस घटना का
विरोध करती है । सोमवार की रात ही अनंतनाग मैं पहंुची। दिल हिला देने वाली यह घटना थी। जो यात्राी मारे गए उनमें ज़्यादातर महिलाएं ही थीं। ये घर चलाती थीं। मुझे यह देख कर जो तकलीपफ हुई है उसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हंै। ये यहां बपर्फानी बाबा को अपनी श्र(ा निवेदित करने आई थी। आज ये ताबूतो में लौट रही हंै।
जम्मू-कश्मीर के आई.जी. मुनीर खान ;कश्मीरद्ध का मानना है कि तीर्थयात्रियों पर सोमवार को हुआ हमला लश्कर-तोएबा की ही कारस्तानी है। अनंतनाग पुलिस के अपने सूत्रों के अनुसार एक विदेशी जिसका नाम इस्माइल है वह लगभग 25-30 साल का है उस पर पुलिस की नज़र थी। उसके बाद ही अमरनाथ यात्रा पर जून माह के लिए सतर्कता नोटिस
पुलिस ने जारी की थी। अब इस वारदात के बाद हिजबुल मुजाहिदीन की भूमिका पर भी सुरक्षा अपफसर जांच-पड़ताल कर रहे हंै। इससे अलग हुए गुट के अध्यक्ष हैं जाकिर मूसा।
आरंभिक जांच पड़ताल से पता चलता है कि कई समूह इस घटना में शरीक थे। इन्होंने
तीन स्थानों से गोलियां चलाई। तीर्थयात्रियों की बस पर रात 8.20 और 8.40 के बीच दो किलोमीटर की दूरी में गोलियां चलीं। नई दिल्ली के खुपिफया अधिकारी यह नहीं मानते कि यह वारदात एलईटी ने की क्योंकि उसमें ज़्यादातर आत्महत्या कर लेने वाले पिफदायिन समूह हैं जिनका मकसद मारना और मरना है। वे भागते नहीं और ज़्यादा से ज़्यादा नुकसान करते हैं। ये स्थानीय आतंकवादी दस्ते भी हो सकते हैं।
एलईटी के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी ने इस हमले की निंदा की। साथ ही कहा कि इस्लाम किसी धर्म के खिलापफ हिंसा की अनुमति नहीं देता। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है सुरक्षा दस्तों और आतंकवादियों में गोलियां चल रही थीं इस बीच दौड़ती बस आई। भारत कश्मीर के यु( को उलझा रहा है।
सूत्रों का अनुमान है कि सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त तौर पर तालमेल कर दक्षिण कश्मीर में आतंकवादियों के नेतृत्व को खत्म करने की सोच रही हंै जहां दो सौ आतंकवादी सक्रिय हैं। इस साल अब तक 80 मारे जा चुके हैं।
मंगलवार को सेनाध्यक्ष विपिन रावत भी श्रीनगर पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। राज्यपाल एन एन वोहरा, श्री अमरनाथ मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष हंै। उन्होंने एक आपात बैठक भी सुरक्षा मुद्दे पर की। उधर कश्मीर में तीर्थयात्रियों के नए दस्तों का आना भी जारी है। वोहरा घायलों से मिले। ज़़्यादातर घायल अनंतनाग और श्रीनगर के अस्पतालों में हंै।
जम्मू-कश्मीर की कैबिनेट बैठक में इस बात की सराहना की गई कि इस हमलेे केे बाद भी कश्मीरियत पर आंच नहीं आई। अनंतनाग के स्थानीय लोगों ने जिस भी तरह संभव हुआ घायलों को तुरंत अस्पताल में दाखिल करवाया और उन्हें राहत दी। जम्मू-कश्मीर सरकार ने मारे गए परिवारों के लोगों को छह लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल को तीन लाख और मामूली घायल को एक लाख रुपए दिए हैं। बस तेजी से भगा कर ज़्यादातर तीर्थयात्रियों को मरने से बचाने वाले उस सलीम शेख का नाम गुजरात के मुख्यमंत्राी ने बहादुरों की राष्ट्रीय तालिका में भेजने को कहा है।
बस ड्राइवर सलीम शेख ने वलसाड से बताया कि वह पिछले बारह साल से लक्जरी बसें चलाता रहा है। पिछले सप्ताह तक आठ बार तीर्थयात्रियों को लाया और ले गया है। लेकिन उसे अब नहीं मालूम कि वह नौंवी बार कब तीर्थयात्रियों को लेकर जाएगा। सोमवार की रात वह इस बस का ड्राइवर था जब आतंकवादियों ने बस को गोलियों से छेद दिया। इसमें सात लोग मारे गए और उन्नीस से ज्यादा घायल हो गए।
‘लेकिन अब जाने से थोड़ी घबराहट होती है। मेरी बीवी और बच्चे इसके लिए शायद ही तैयार हांे।’ शेख ने कहा। यों तो महाराष्ट्र में जलगांव के ये लोग रहने वाले हंै। लेकिन बचपन में ही वह गुजरात आकर बसा था। मंगलवार को सलीम शेख परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के साथ खुली जीप में बैठ कर वलसाड के घर आया। उसका स्वागत पत्नी साजिदा शेख, दोनों बच्चों और बेटी ने किया। जैसे ही जीप से सलीम उतरा, रोती हुई साजिदा ने उसे बाहों में ले लिया और उसके माथे को चूमा। उसने बताया कि ‘मुझे खुशी है कि वह घर लौटा। पहले तो यह जाना ही नहीं चाहता था क्योंकि हमारे सबसे बड़े बच्चे के कान का आॅपरेशन होना है। हमारी आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं है इसलिए वह दो जुलाई को तीर्थयात्रियों की बस लेकर चला। मुझे खुशी है कि उन्होंने इतने लोगों की जान बचाई।’
सोमवार को हुए हमले को याद करते हुए सलीम ने बताया कि तीर्थयात्रियों ने यात्रा पूरी कर ली थी। हमारी योजना थी कि हम वैष्णों देवी जाएंगे। हम कटरा के पास थे। हमारी बस भी एक कारवां का हिस्सा बन गई । तभी कुछ देर बाद एक टायर पंचर हो गया। हम रुक गए। टायर दुरुस्त कर हम चले लेकिन कारवां तो कहीं आगे निकल चुका था।
‘हमने हिम्मत की । पूरे रास्ते हर कहीं अंधेरा था। अचानक हमें पीेछे से आवाजें सुनाई दी। पटाखों के बजने की कोई वजह तो नहीं थी। ये आवाज गोलियों की थी। मुझे लगा कि शायद आतंकवादियों ने हम पर हमला कर दिया है। अब गोलियां बस के अंदर आने लगी थी। इस बार ड्राइवर की ओर, बोनट पर और बस के दूसरे हिस्सों पर। उधर तीर्थयात्राी शोर कर रहे थे। चीख-पुकार बस में मची थी। मैं बस को तेजी से भगाता रहा। तकरीबन दो-ढाई किलोमीटर आगे तक। हमें मिलिट्री का एक शिविर दिखा। वहीं हमने बस रोक दी।’
एक गोली लगी थी हर्ष देसाई को। हर्ष बेटे हैं जवाहर देसाई के जो ओम ट्रेवेल्स चलाते हंै। वे ही इस बस के मालिक भी हैं। हर्ष मेरे बगल में बैठा था। उसे गोली लगी । मैंने सारी घटना सेना के अधिकारियों को सुनाई। सभी यात्राी बस से निकाले गए और अस्पताल पहंुचाए गए। सेना के अधिकारियों ने तेजी से बस भगाने की मेरी कला की सराहना की और कहा कि अन्यथा सभी मारे जाते।
आतंकवादियों ने निशाने पर लिया था शेख को । ‘लेकिन बेहद झुक कर हमने जिस तरह ड्राइविंग की वह गजब की थी।’ शेख ने कहा,‘ मैं इसलिए बच गया क्योंकि उसकी पत्नी, बच्चे हमेशा प्रार्थना करते हैं।’
कश्मीर सरकार ने विशेष जांच कमेटी नियुक्त की है। वह जांच करेगी कि हमला क्यों हुआ और कैसे हुआ। पुलिस का कहना है कि इस घटना में लश्कर की भागीदारी है। हम चाहते हैं कि विस्तृत छानबीन करके एक बड़ी रपट बनाई जाए। छोटे से छोटा मुद्दा भी न छूटने पाए। हमें तमाम छोटे-बड़े साक्ष्य सुरक्षित रखने होंगे जिससे यह पता लग सके कि इस नृशंस वारदात के पीछे कौन लोग हंै। भविष्य के लिहाज से भी यह बेहतर होगा।
यह भी जांच कराई जाएगी कि बस कैसे सड़क पर चलती रही और उसे किसी सुरक्षा नाके पर क्यों नहीं रोका गया । जबकि शाम ढलने के बाद आवाजाही पर रोक है। जब तीर्थयात्रियों की गाड़ी चलती है तो उसके साथ सुरक्षा गाड़ियां भी होती हंै। यह भी चेक किया जाएगा कि यह बस सुरक्षा दस्तों के पास रजिस्टर्ड क्यों नहीं थी।
मुख्यमंत्राी महबूबा मुफ्रती ने कहा कि इस जघन्य घटना पर उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्राी
राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्राी नरेंद्र मोदी से बातचीत भी की। इसके अलावा उन्होंने सेना प्रमुख से भी मुलाकात की थी। प्रधानमंत्राी कार्यालय में राज्य मंत्राी और उधमपुर के सांसद जीतेंद्र सिंह से भी बातचीत की। केंद्रीय नेताओं ने इस कठिन समय में राज्य को अच्छा सहयोग दिया है।
ड्राइवर – क्लीनर ने बचाया
गुजरात के बलसाड जिले के वडोली गांव के रमेश पटेल ने बताया कि ज़्यादातर तीर्थयात्रियों को मारे जाने से बचाने में बस ड्राइवर सलीम शेख और क्लीनर की बड़ी भूमिका थी। ड्राइवर ने गोली की आवाज़ जैसे सुनी उसने गाड़ी को दस-पंद्रह मिनट भगाते हुए आर्मी कैंप पर ही जाकर रोका। एक
आतंकवादी ने गोलियों की आवाज़ के दौरान ही बस का दरवाजा खोलकर बस में घुसने की कोशिश की तो क्लीनर में उसे धक्का दिया। चलती बस में क्लीनर के धक्का देने से वह बस में नहीं चढ़ पाया।

(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 14 Issue 14, Dated 21 July 2017)

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