‘मोदी न हों तो पार्टी का नामलेवा न हो’

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आम चुनाव में वाराणसी संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बन गए नरेंद्र मोदी। वे दूसरी बार वाराणसी की जनता- जर्नादन के दरबार में वोट मांगने पहुंचे। गुरूवार (25अप्रैल) की शाम उन्होंने अपनी जबरदस्त शोभायात्रा (रोड़ शो) निकाली। शोभायात्रा में शामिल गाडिय़ों के गुजऱ जाने के बाद भी सड़कें गेंदे और गुलाब की पंखुडिय़ों की महक से महकते रहे।

अपनी इस शोभायात्रा के बाद से तो प्रधानमंत्री और ज़्यादा प्रसन्न हैं। वाराणसी और देश की जनता उन्हें मोदी यानी कमल वाले चौकीदार के रूप में जानती मानती रही हंैं। देश का मध्यम वर्ग उन्हें एक ऐसे अवतारी के रूप में जानता मानता है जिसने उन्हें देश विदेश में विभिन्न उद्योगों में अपनी मेहनत को आजमाने का मौका दिलाया। गांवों की चौपालों में यही चर्चा होती है कि डीज़ल महंगा हो गया। पेट्रोल महंगा हो गया। बेटुआ आज एक निज़ी कंपनी में फसल बीमा का एजेंट है। हर महीने बिना धूल-माटी एक ठंडा घर में मेज पर बैठ कर कंप्यूटर चला कर महीना में बीस-बाइस हज़ार तो कमा ही रहा है मोदी जी के कारण। पहिले के जमाना में तो ऐसा नहीं था। मोदी ठीक हैं। लेकिन उनके साथ के दूसरे नेता बस अपने खाए-पिए के जुगाड़ में रहते हैं। मोदी न रहें तो पार्टी का कोई नाम भी न ले। यह प्रतिक्रिया है वाराणसी संसदीय क्षेत्र के बशिंदों की।

यह सच्चाई पार्टी भी जानती है। संघ परिवार भी जानता है और खुद मोदी भी। अपनी चुनावी सभाओं में वे यह कहना नहीं भूलते कि आप कमल को वोट देंगे तो वह सीधे नरेंद्र मोदी को मिलेगा। यानी आपका यह चौकीदार फिर आपकी सेवा में हाजिर। लेकिन इससे पार्टी में ही एक द्वंद्व है। यानी कल की चिंता आज और अभी से।

तमाम सावधानियों को बरतने और उनका ध्यान रखने वाले आज भी दो चीज़ों का ध्यान ज़रूर रखते हैं। एक तो हर बूथ पर भाजपा के कार्यकर्ताओं की आपसी बैठक होती है और कार्यकर्ता बूथ तक मतदाता लाता है। शोभायात्रा के लिए आस-पास के जि़लों से लाई गई भीड़, शहर के स्थानीय लोग भाजपा के महागठबंधन के सभी मुख्य नेताओं की मौजूदगी, शिरोमाणि अकाली दल के 93 वर्षीय नेता प्रकाश सिंह बादल के चरण छूने के बाद नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को (26 अप्रैल) जि़लाधिकारी के कमरे में जाकर अपना नामांकन दाखिल किया। उन्हें अब अपने ही नहीं, पार्टी गठबंधन में शामिल सभी पार्टियों के नेताओं के जीतने का पूरा भरोसा है।

अपने इसी भरोसे के कारण वे कहते हैं कि राजनीति के पंडितों को, चुनावी नतीजों को आकलन करने वाले सभी महा गुरूओं को आपस में मिल बैठ कर इंकबैंसी की पारंपरिक थ्योरी में बदलाव लाना चाहिए। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस बार वे उनकी पार्टी और गठबंधन के सभी दल साधारण से भी ज़्यादा बहुमत से जीतेंगे।

खुद के पार्टी और संघ परिवार के सदस्यों की मेहनत, लगन और दूरदृष्टि से प्रभावित नरेंद्र मोदी दिल खोलकर ठठाकर हंसते हैं। उनकी हंसी से सकपका जाते हैं भाजपा के दूसरे नेता। फिर सभी हंसते दिखते हैं। फिर माला पहनाने का सिलसिला। हर बार जब उनके ऊपर माला आती है तो नरेंद्र मोदी मुस्कराते हैं। फिर कहते हैं- ‘ हर मतदाता को वोट देना चाहिए। कल के रोड शो के बाद तो सबने मन बना लिया है। उन्हें पता है कि वोट किसे देना हैं और कौन जीतेगा।’

वाराणसी में भाजपा नेताओं ने इस भीषण गर्मी में एक बहुरूपिया लाल रंग में एक हनुमान खड़ा कर रखा था। उसके बाजे और करबत पर कोई नेता ध्यान नहीं दे रहा था। कितना अमानवीय और भद्दा मजाक था नाम पर धर्म के।

प्रधानमंत्री के नामांकन समारोह में भी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मेंहद्र नाथ पांडेय, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह आदि मौजूद थे।

अभूतपूर्व शोभायात्रा, अभूतपूर्व गंगा आरती, अभूतपूर्व बैठक गणमान्य लोगों के साथ, बेहद अभूतपूर्व।