मोदी की ‘घर वापसी’ इसी चुनाव में

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निर्दलीय विधायक और दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवानी ने कहा कि इस साल के आम चुनाव में मोदी की ‘घर वापिसी’ ज़रूर हो जाएगी। देश में बेरोजगार युवाओं का आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा है। केंद्र में सरकार किसी भी बने पर उसे राजपाट संभालने के 100 दिन के अंदर सरकारी क्षेत्र में खाली 24 लाख पद पर नियुक्तियां करनी होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में सात फरवरी को जब यह जानाकरी दे रही थे कि उनकी सरकार ने पांच साल में लाखों युवाओं को रोज़गार से जोड़ा। इसके साथ ही वे उन्होंने फार्मल और इनफार्मेल क्षेत्रों में रोजगार की बदलती परिभाषा पर अपनी व्याख्या भी दी। उसी समय देश के तकरीबन पचास युवा संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे युवा एक बड़े जुलूस में रोज़गार  की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे। यह जुलूस पुलिस निर्देश के चलते दिल्ली में जामा मस्जिद में मंडी हाउस तक ही जा सका। लेकिन इसमें शामिल युवाओं ने अपनी इस कूच से प्रधानमंत्री के दावों की कलई खोल दी।

इसके पहले यंग इंडिया अधिकार मार्च के समर्थन में 22 जनवरी को नागरिक सभा दिल्ली प्रेस क्लब में हुई थी। जिसमें युवाओं की मांगों और सरकारों की अनदेखी पर बातचीत की गई थी।

दिल्ली में युवा अधिकार मार्च में रेलवे के अप्रेंटिस कर्मचारी भी शामिल हुए। ऑल इंडिया रेलवे अप्रेंटिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चंदन पासवान ने बताया कि आईआईटी पास युवा रेलवे में अप्रेटेंसिस भरती हुए। साल भर काम किया। यानी डबल स्किल होने पर भी हमें नौकरी नहीं दी गई। जबकि पहले अप्रेंटिस को नौकरी में वरीयता थी। मोदी सरकार सिर्फ हमारे 20 फीसद लोगों को नौकरी दे रही है। जबकि पहले 100 फीसद नौकरी मिलती थी।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा वित्त मंत्री अमेरिका में इलाज करा रहे हैं। वे ट्वीट करते हैं देश में बेरोज़गारी समस्या नहीं हैं। अब अगर ऐसा नहीं है तो आंदोलन पर युवा क्यों हैं? आज हजारों की संख्या में ऐसे देश में युवा दिल्ली पहुंचे हैं। उसे देख कर हालात का अनुमान लगा सकते हैं।  पंजाब विश्वविद्यालय की अध्यक्ष कनुप्रिया ने कहा, संघ और भाजपा देश भर में विश्वविद्यालयों के परिसरों को जेल में बदल रही है। छात्र भी इसका प्रतिरोध कर रहे हैं। हमारे आंदोलन को प्रशासन ने कुचलना चाहा। हमारे विरोध पर वे झुके। अब वहां कोई कफ्र्यू नहीं है। पूर्वाेत्तर से भी काफी संगठन आए थे। असम के गोहाटी से आए छात्र नेता रजीत करमसा ने कहा, मोदी सरकार ने उत्तरपूर्व के लोगों को ठगने का काम किया है। इस कारण आज पूरे उत्तरपूर्व राज्यों में आंदोलन की आग लगी है। उन्होंने नागरिक संशोधन बिल को जबरन लागू करने की प्रयास शुरू कर दिए हैं। उसका विरोध जताने भी हम आए हैं।  जेएनयू छात्र संघ में अध्यक्ष एन आई बालाजी ने कहा, इस सरकार ने हर साल दो करोड़ रोजगार का वादा किया था। लेकिन पांच साल में इस सरकार के दौरान ही सबसे ज्य़ादा बेरोज़गारी है। फिर छात्रों पर विश्वविद्यालय प्रशासन, यूजीसी और दूसरे तरीकों से लगातार हमले यह सरकार कर रही है।

जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया ने कहा, दंगा नहीं, युवाओं कोरोजगार चाहिए, जुमला नहीं, अधिकार चाहिए। आज देश में व्यापक छात्र युवा एकता बेहद ज़रूरी है क्योंकि मोदी  जी अपनी जुमलेबाजी पांच साल और चाहते हैं। उन्होंने छात्रों ईवीएम पर काबू पाने की पूरी कोशिश की लोगों पर गोलियां चलाई, गिरफ्तारियां की लेकिन वे देश के अंदर लोकतंत्र की आवाज कुचल नहीं पा रहे। लोग अपने हक और अधिकार के लिए आज सड़क पर उतर रहे हैं। ये कहते हैं, मोदी नहीं तो देश में कौन? अरे भाई, मोदी के खिलाफ हिंदुस्तान के ढेरों युवा हैं। इनके पास है मोदी का विकल्प। इसी लिए आज वे सड़क पर उतरे हैं।

गुजरात के युवा दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने कहा मोदी सरकार, दरअसल जुमला सरकार है। अगर नौजवान मोदी सरकार को सत्ता में ला सकता है तो उसे सत्ता से उतार भी सकता है। अगर मोदी ईवीएम सीबीआई के भरोसे सत्ता में लौटते की सोच रहे हैं तो अबकी उनके जुमले नहीं चलेंगे।

इस सभा में पहुंचे माकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि किसान परिवारों के लिए इस सरकार ने रु पए छह हज़ार मात्र सालाना की घोषणा की है। यनी महीने में पांच सौ और पांच लोग यह परिवार में है तो रोज हर सदस्य के लिए सिर्फ रु पए तीन मात्र और तीस पैसे। यह किसानों का अपमान है। तीन रु पए और तीस पैसे में आज एक कप चाय भी नहीं मिलती। क्या यह किसानों की मदद है।

उन्होंने कहा, इस मोदी सरकार ने किसानों, मज़दूरों युवाओं के साथ मजाक किया है। अगर लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नौजवान, मज़दूर किसान एक हो जाएं तो देश में धर्म-जाति के नाम पर नफरत, लूट और झूठ बंद हो जाएगा। युवाओं की लड़ाई के साथ हम हैं और साथ-साथ इस लड़ाई को और तेज करेंगे जिससे मोदी की सरकार जाए। परिसर ‘मोदी की ‘घर वापिसी’ इसी चुनाव में’

निर्दलीय विधायक और दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवानी ने कहा कि इस साल के आम चुनाव में मोदी की ‘घर वापिसी’ ज़रूर हो जाएगी। देश में बेरोजगार युवाओं का आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा है। केंद्र में सरकार किसी भी बने पर उसे राजपाट संभालने के 100 दिन के अंदर सरकारी क्षेत्र में खाली 24 लाख पद पर नियुक्तियां करनी होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में सात फरवरी को जब यह जानाकरी दे रही थे कि उनकी सरकार ने पांच साल में लाखों युवाओं को रोज़गार से जोड़ा। इसके साथ ही वे उन्होंने फार्मल और इनफार्मेल क्षेत्रों में रोजगार की बदलती परिभाषा पर अपनी व्याख्या भी दी। उसी समय देश के तकरीबन पचास युवा संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे युवा एक बड़े जुलूस में रोज़गार  की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे। यह जुलूस पुलिस निर्देश के चलते दिल्ली में जामा मस्जिद में मंडी हाउस तक ही जा सका। लेकिन इसमें शामिल युवाओं ने अपनी इस कूच से प्रधानमंत्री के दावों की कलई खोल दी।

इसके पहले यंग इंडिया अधिकार मार्च के समर्थन में 22 जनवरी को नागरिक सभा दिल्ली प्रेस क्लब में हुई थी। जिसमें युवाओं की मांगों और सरकारों की अनदेखी पर बातचीत की गई थी।

दिल्ली में युवा अधिकार मार्च में रेलवे के अप्रेंटिस कर्मचारी भी शामिल हुए। ऑल इंडिया रेलवे अप्रेंटिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चंदन पासवान ने बताया कि आईआईटी पास युवा रेलवे में अप्रेटेंसिस भरती हुए। साल भर काम किया। यानी डबल स्किल होने पर भी हमें नौकरी नहीं दी गई। जबकि पहले अप्रेंटिस को नौकरी में वरीयता थी। मोदी सरकार सिर्फ हमारे 20 फीसद लोगों को नौकरी दे रही है। जबकि पहले 100 फीसद नौकरी मिलती थी।

आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे ने कहा वित्त मंत्री अमेरिका में इलाज करा रहे हैं। वे ट्वीट करते हैं देश में बेरोज़गारी समस्या नहीं हैं। अब अगर ऐसा नहीं है तो आंदोलन पर युवा क्यों हैं? आज हजारों की संख्या में ऐसे देश में युवा दिल्ली पहुंचे हैं। उसे देख कर हालात का अनुमान लगा सकते हैं।

पंजाब विश्वविद्यालय की अध्यक्ष कनुप्रिया ने कहा, संघ और भाजपा देश भर में विश्वविद्यालयों के परिसरों को जेल में बदल रही है। छात्र भी इसका प्रतिरोध कर रहे हैं। हमारे आंदोलन को प्रशासन ने कुचलना चाहा। हमारे विरोध पर वे झुके। अब वहां कोई कफ्र्यू नहीं है।

पूर्वाेत्तर से भी काफी संगठन आए थे। असम के गोहाटी से आए छात्र नेता रजीत करमसा ने कहा, मोदी सरकार ने उत्तरपूर्व के लोगों को ठगने का काम किया है। इस कारण आज पूरे उत्तरपूर्व राज्यों में आंदोलन की आग लगी है। उन्होंने नागरिक संशोधन बिल को जबरन लागू करने की प्रयास शुरू कर दिए हैं। उसका विरोध जताने भी हम आए हैं। जेएनयू छात्र संघ में अध्यक्ष एन आई बालाजी ने कहा, इस सरकार ने हर साल दो करोड़ रोजगार का वादा किया था। लेकिन पांच साल में इस सरकार के दौरान ही सबसे ज्य़ादा बेरोज़गारी है। फिर छात्रों पर विश्वविद्यालय प्रशासन, यूजीसी और दूसरे तरीकों से लगातार हमले यह सरकार कर रही है। जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया ने कहा, दंगा नहीं, युवाओं कोरोजगार चाहिए, जुमला नहीं, अधिकार चाहिए। आज देश में व्यापक छात्र युवा एकता बेहद ज़रूरी है क्योंकि मोदी  जी अपनी जुमलेबाजी पांच साल और चाहते हैं। उन्होंने छात्रों ईवीएम पर काबू पाने की पूरी कोशिश की लोगों पर गोलियां चलाई, गिरफ्तारियां की लेकिन वे देश के अंदर लोकतंत्र की आवाज कुचल नहीं पा रहे। लोग अपने हक और अधिकार के लिए आज सड़क पर उतर रहे हैं। ये कहते हैं, मोदी नहीं तो देश में कौन? अरे भाई, मोदी के खिलाफ हिंदुस्तान के ढेरों युवा हैं। इनके पास है मोदी का विकल्प। इसी लिए आज वे सड़क पर उतरे हैं।

गुजरात के युवा दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने कहा मोदी सरकार, दरअसल जुमला सरकार है। अगर नौजवान मोदी सरकार को सत्ता में ला सकता है तो उसे सत्ता से उतार भी सकता है। अगर मोदी ईवीएम सीबीआई के भरोसे सत्ता में लौटते की सोच रहे हैं तो अबकी उनके जुमले नहीं चलेंगे।

इस सभा में पहुंचे माकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि किसान परिवारों के लिए इस सरकार ने रु पए छह हज़ार मात्र सालाना की घोषणा की है। यनी महीने में पांच सौ और पांच लोग यह परिवार में है तो रोज हर सदस्य के लिए सिर्फ रु पए तीन मात्र और तीस पैसे। यह किसानों का अपमान है। तीन रु पए और तीस पैसे में आज एक कप चाय भी नहीं मिलती। क्या यह किसानों की मदद है।

उन्होंने कहा, इस मोदी सरकार ने किसानों, मज़दूरों युवाओं के साथ मजाक किया है। अगर लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नौजवान, मज़दूर किसान एक हो जाएं तो देश में धर्म-जाति के नाम पर नफरत, लूट और झूठ बंद हो जाएगा। युवाओं की लड़ाई के साथ हम हैं और साथ-साथ इस लड़ाई को और तेज करेंगे जिससे मोदी की सरकार जाए।