मॉब लिंचिंग पर रिपोर्ट पेश न करने पर पड़ी कई राज्यों को फटकार

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उच्च न्यायलय ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने से संबंधित अपनी रिपोर्ट न सौंपने पर कई राज्यों की खिंचाई करते हुए एक हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है।
याद रहे जुलाई १७ को मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए शीर्ष न्यायालय ने राज्यों को अपने यहां एक व्यवस्था बनाने का आदेश दिया था  लेकिन अब तक 29 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों में से सिर्फ 11 ने इन्हें लागू किए जाने की रिपोर्ट पेश की है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, “अगर रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो संबंधित राज्यों के गृह सचिवों को खुद अदालत में उपस्थिति देनी होगी।”
इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को सूचित किया कि अदालत के फैसले के बाद भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के बारे में कानून बनाने पर विचार के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया है। कोर्ट कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मॉब लिंचिंग मामले में उत्तर प्रदेश की सरकार ने कोर्ट को बताया कि उनकी सरकार ने 17 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन किया है. मॉब लिंचिंग की घटना को रोकने के लिए सभी जिलों के SP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है.
आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी सरकार की ओर से कहा गया है कि नोडल ऑफिसर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो उन लोगों पर नजर रखेगी जो हिंसा को भड़काते हैं या अफ़वाह के जरिए माहौल बनाने की कोशिश करते हैं.
नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ हर महीने में कम से एक बार मीटिंग करेगा. नेशनल हाई-वे पर पुलिस की पेट्रोलिंग शुरू की जा चुकी है. उन इलाकों में भी पेट्रोलिंग की जा रही है जहां लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं.
कोर्ट को सरकार के द्वारा बताया गया है कि अगर कोई लिंचिंग की घटना में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा पीड़ित परिवार को पुलिस पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी.
उच्च न्यायलय ने राजस्थान सरकार को भी रकबर खान की हत्या के मामले में की गई कार्रवाई पर एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने को कहा। किसान रकबर की 20 जुलाई को अलवर में कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
इससे पहले कोर्ट ने पूनावाला की याचिका पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में अदालत के फैसले के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदेश के पुलिस प्रमुख, मुख्य सचिव समेत अन्य अफसरों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कोर्ट ने निर्देश दिया है कि समाज में शांति-सद्भाव हर हाल में बनाए रखना होगा। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर मॉब लिंचिंग के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।