‘महिलाओं पर अंगुली उठाना हमेशा से आसान रहा है’ | Tehelka Hindi

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‘महिलाओं पर अंगुली उठाना हमेशा से आसान रहा है’

महज 19 साल की उम्र में पत्रलेखा ने टाटा डोकोमो, फैंटा और ब्लैकबेरी के विज्ञापन करने शुरू कर दिए थे. हंसल मेहता की फिल्म सिटीलाइट्स (नीचे, दाएं) से उन्होंने बॉलीवुड में भी कदम रख दिया है. इसमें उनके साथी कलाकार हैं राजकुमार राव. सिटीलाइट्स वर्ष 2013 में आई ब्रिटिश-फिलीपीनी फिल्म मेट्रो मनीला से प्रेरित है. पत्रलेखा सोमनाथ गुप्ता की बांग्ला फिल्म ढाकेर शाज में भी काम कर रही हैं.
2014-06-15 , Issue 11 Volume 6
Patralekhaa

पत्रलेखा, मॉडल अभिनेत्री (24 वर्ष)

क्या अभिनय का ख्वाब बचपन से ही था?
मैं शिलॉन्ग में पली लेकिन मेरी स्कूली शिक्षा बेंगलुरु के बिशप कॉटन कान्वेंट स्कूल में हुई. बोर्डिंग के दिनों में हम पढ़ाई के अलावा तमाम गतिविधियों में हिस्सा लेते थे और मेरा उनकी ओर तगड़ा झुकाव हो गया. इसमें खेल और ड्रामा शामिल थे. लेकिन कभी भी मैंने यह नहीं सोचा कि मैं मॉडल या अभिनेत्री बनूंगी.

तो बॉलीवुड में कैसे आना हुआ?
मेरे परिवार का झुकाव शिक्षा की ओर था. मैं ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए मुंबई चली गई और चार्टड अकाउंटेंट बनने की योजना बनाने लगी. उसी दौरान मैंने विज्ञापनों में काम शुरू किया. जल्दी ही मुझे कास्टिंग डायरेक्टर्स के फोन आने लगे कि मैं ऑडीशन दूं. लेकिन मैं फिल्मों में पूरी तैयारी से आना चाहती थी. मैंने दो साल का ब्रेक लिया और कॉलेज की शिक्षा पूरी की. इस बीच मैंने  तमाम अप्रेंटिश और वर्कशॉप आदि किए. जब मुझमें आत्मविश्वास आ गया तो मैंने फिल्मों के लिए ऑडीशन देना शुरू किया. इस तरह मुझे सिटीलाइट्स में काम मिला.

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(Published in Tehelkahindi Magazine, Volume 6 Issue 11, Dated 15 June 2014)

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