मध्यप्रदेश: उलटा पड़ा अविश्वास

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DSC_1620_58065753411 जुलाई को मध्य प्रदेश विधानसभा के हंगामेदार होने की सौ फीसदी संभावना तो थी लेकिन कौन जानता था कि यह दिन प्रदेश की राजनीति का अति नाटकीय दिन साबित होगा.

अविश्वास प्रस्ताव के जरिए विपक्षी दल कांग्रेस भाजपा सरकार को हिला देने की तैयारी से आई थी. किंतु विधानसभा के भीतर ही कांग्रेस विधायक दल के उपनेता चौधरी राकेश सिंह ने भाजपा से ऐसे हाथ मिलाया कि कांग्रेस का दांव उलटा पड़ गया.

इस घटनाक्रम पर सरसरी नजर डालें तो कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए कि उनके पीछे उन्हीं के दल के उपनेता चौधरी राकेश सिंह ने यह कहते हुए हवा निकाल दी कि अविश्वास प्रस्ताव अधूरा है. इतना सुनना था कि भाजपा विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और थोड़ी देर बाद रोहाणी ने नेता प्रतिपक्ष के प्रस्ताव का उपनेता द्वारा विरोध करने पर शून्य मान लिया. इसके पहले कि कांग्रेस राकेश सिंह को पार्टी से निकालती, वे मुख्यमंत्री चौहान के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे और भाजपा में शामिल हो गए.

काबिले गौर है कि यह मप्र की 13वीं विधानसभा का आखिरी दिन था. और चुनावी सरगर्मियों के मद्देनजर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के बयानों से जाहिर था कि इस बार उनके द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव हंगामेदार रहेगा. दरअसल सिंह ने एक हफ्ते पहले ही साफ कर दिया था कि इस बार वे मुख्यमंत्री के परिजनों और करीबियों के भ्रष्टाचार से जुड़े मामले उठाएंगे. जवाब में चौहान ने भी सार्वजनिक तौर पर अपने विधायकों को जता दिया था कि ऐसे हालात में उन्हें चुप नहीं बैठना हैं. लेकिन 11 जून को सदन में जो हुआ वह अप्रत्याशित था और अभूतपूर्व भी.

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