भारतीय अफसरों को फँसाती है आईएसआई

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राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) इस बात की जाँच कर रही है कि कैसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने भारतीय अधिकारियों को अपने जाल में फँसाने के लिए हनीट्रैप और धन का इस्तेमाल किया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी दविंदर सिंह पर 11 जनवरी, 2020 को आम्र्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया गया है। इसमें सम्भव है कि आईएसआई ने भारतीय अधिकारियों को गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के लिए महिलाओं और धन का इस्तेमाल किया गया हो।

कुछ माह पहले की बात है कि जब भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पुलिस, अद्र्धसैनिक बल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाने के लिए आईएसआई द्वारा संचालित कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया था। कॉल सेंटर में भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल अधिकतर भारतीय महिलाओं के नाम पर किया गया था। इन्हीं सिम कार्ड का इस्तेमाल करके भारतीय महिलाओं के नाम से फेसबुक पर फर्ज़ी आईडी बनायी गयी थीं। ये वास्तव में पाकिस्तानी महिलाएँ थीं, जो हनी ट्रैप के ज़रिये फँसाकर भारतीय अधिकारियों से दोस्ती का ऑफर देकर उनसे गुप्त सूचनाएँ हासिल करती थीं। गिरफ्तार अधिकारी ने दावा किया है कि वह एक ऑपरेशन कर रहा था। डीएसपी दविंदर सिंह श्रीनगर हवाई अड्डे पर एंटी-हाइजैकिंग यूनिट में तैनात थे और इसलिए यह गुप्त रूप से संचालित ऑपरेशन में शामिल नहीं हो सकते थे। गिरफ्तार डीएसपी को दक्षिण कश्मीर में 11 जनवरी को जम्मू में दो आतंकियों के साथ पकड़ा गया था। दविंदर पर आरोप है कि वह शोपियाँ इलाके से आतंकियों को घाटी से बाहर निकलवा रहा था। अब दविंदर सिंह के िखलाफ एक और मामला दर्ज किया गया है। जम्मू-कश्मीर के पुलिस उप अधीक्षक दविंदर सिंह की गिरफ्तारी से जुड़े मामले को फिर से दर्ज करने के बाद, एनआईए अधिकारी अब 2005 में उनके लिखे कथित पत्र की भी जाँच करने की तैयारी में है। इंटेलिजेंस ब्यूरो को मिले पत्र में पाया गया था कि डीएसपी को कश्मीर से दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर तक पहुँचाने के लिए आतंकियों को सुरक्षित रास्ता देना था। इन चार आतंकियों में से एक को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अब उनको आतंकी वाली धाराओं में मामला दर्ज किया गया था; लेकिन जाँच आगे बढ़ती इससे पहले मामले को एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया है। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। एनआईए ने दविंदर के 2005 में लिखे कथित पत्र को अपने कब्ज़े में ले लिया है और इसे फोरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अनुसार, उनसे मिली जानकारी के आधार पर चलाये गये तलाशी अभियान में चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, उनके पास से पुलिस ने पालम एयरबेस का एक स्केच ज़ब्त किया और डीएसपी द्वारा गिरफ्तार आतंकवादियों में से एक को पत्र भी लिखा था। आईबी ने कहा कि दविंदर सिंह के हस्ताक्षर वाले पत्र में पिस्टल और वायरलेस सेट ले जाने की अनुमति दी गयी थी।

डीएसपी दविंदर सिंह के लेटर हेड पर लिखे गये पत्र में सभी सुरक्षा एजेंसियों को बिना किसी सत्यापन के ‘सुरक्षित मार्ग’ देने को कहा गया था। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी दविंदर सिंह को यूएपीए के तहत मामला दर्ज करने के बाद उनको निलंबित कर दिया है। उन पर यूएपीए की धारा-18, 19, 20 और 38, 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एनआईए की शुरुआती जाँच में सुझाव दिया गया है कि यह पहली बार नहीं था जब दविंदर सिंह ने आतंकियों को बाहर निकालने में मदद की हो। यूएपीए की धारा-38 यह स्पष्ट करती है कि एक व्यक्ति, जो खुद को किसी आतंकवादी संगठन के साथ जोड़ता है या उनकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में उनकी मदद करता है, तो एक तरीके से वह आतंकी संगठन से जुड़े होने की तरह ही अपराध करता है। जम्मू-कश्मीर के पुलिस अधिकारी पर यूएपीए की धारा-39 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोपी शख्स आतंकी संगठन को समर्थन देने के साथ ही उससे जुडक़र अपराध में लिप्त है। इतना ही नहीं, आतंकी संगठन की गतिविधि को आगे बढ़ाने के इरादे से एक बैठक को सम्बोधित करता है। आतंकवादी संगठन के लिए समर्थन या अन्य गतिविधि को आगे बढ़ाने के उद्देश्य में भी सम्मिलित होता है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो ने शुरुआती जाँच में पाया है कि पत्र में डीएसपी ने दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर दिल्ली पुलिस द्वारा कश्मीर से दिल्ली जाते समय पकड़े गये चार आतंकियों में से एक को सुरक्षित मार्ग देने के लिए कहा था। वर्तमान में आरोपी के िखलाफ गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। अब मामले को एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया है। इसके साथ ही उससे पूछताछ व अन्य खुलासे के लिए अदालत से उसे 15 दिन के रिमांड पर लिया। एनआईए ने दविंदर के लिखे 2005 के पत्र को अपने कब्ज़े में ले लिया है और उसे फोरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया है।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अनुसार, चार आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें पुलिस ने पालम एयरबेस का एक स्केच ज़ब्त किया और  उनमें से एक के पास से डीएसपी का लिखा पत्र भी बरामद हुआ था। आईबी ने कहा कि दविंदर सिंह जो तत्कालीन सीआईडी पुलिस अधीक्षक थे, उनके हस्ताक्षर थे और इसमें लिखा था कि आतंकी को को पिस्तौल और एक वायरलेस सेट ड्यूटी पर ले जाने की अनुमति है।

डीएसपी दविंदर सिंह के लेटर हेड पर लिखे गये पत्र में सभी सुरक्षा एजेंसियों को बिना किसी सत्यापन के ‘सुरक्षित मार्ग’ देने के लिए कहा गया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी दविंदर सिंह को आम्र्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किये जाने के बाद पद से निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया है। डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार, गिरफ्तार अधिकारी ने दावा किया है कि वह एक ऑपरेशन कर रहा था। दुर्भाग्य से िफलहाल एकत्र किये गये सबूत उनके पक्ष में नहीं हैं।

गिरफ्तार अधिकारी को श्रीनगर हवाई अड्डे में तैनात एंटी-हाईजैकिंग यूनिट में तैनात किया गया था और इसलिए गुप्त आतंकवाद निरोधी कार्यों में शामिल नहीं हो सकता था। डीजीपी ने जाँच के निष्कर्षों के विवरण को बताने से इन्कार करते हुए कहा कि सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशनों का प्रतिकार करना आवश्यक है और उन्हें प्रक्रिया के तहत बहुत सावधानी से चलाने की ज़रूरत है। व्यक्तिगत लाभ के लिए स्रोतों का उपयोग करना बहुत भयानक है। जम्मू-कश्मीर पुलिस पुराने मामलों में डीएसपी दविंदर की भूमिका की भी जाँच कर रही है, जो उनकी निगरानी में किये गये।