बेरोज़गारी पर जनता के गुस्से को भुनाते हैं मोदी जैसे नेता: राहुल गाँधी

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा एवं आरएसएस पर अपने हमले को तेज करते हुए कहा है कि लोग अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे जनवादी नेताओं का समर्थन इसलिए करते हैं क्योंकि वे नौकरी नहीं होने को लेकर गुस्से में हैं।

लंदन में भारतीय पत्रकारों के संघ से बातचीत करते हुए गांधी ने कहा कि समस्या के समाधान की बजाए ये नेता उस गुस्से को भुनाते हैं और देश को नुकसान पहुंचाते हैं।

राहुल ने इससे पहले कहा था कि भारत में बेरोजगारी का ‘संकट बड़ा है’ और भारत सरकार इसे स्वीकार नहीं करना चाहती।

प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एक संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि चीन एक दिन में 50,000 नौकरियों का सृजन करता है जबकि भारत में एक दिन में केवल 450 नौकरियां ही पैदा होती हैं। यह एक आपदा है।

एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि वे अभी फिलहाल प्रधानमंत्री बनने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पत्रकारों ने सवाल किया, ‘क्या आप खुद को भारत के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा, ‘फिलहाल मैं इस बारे में नहीं सोच रहा। मैं खुद को एक वैचारिक लड़ाई लड़ने वाले के तौर पर देखता हूं। मुझमें यह बदलाव 2014 के बाद आया। मुझे लगा कि भारत में जैसी घटनाएं हो रही हैं, उससे भारत और भारतीयता को खतरा है। मुझे इससे देश की हिफाजत करनी है। ‘

जब राहुल से पूछा गया कि उनके पास सरनेम के अलावा और क्या है तो उन्होंने कहा कि उन्हें सुने बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए.

उन्होंने ब्रिटेन के पत्रकारों से कहा कि उनकी ‘क्षमता’ के आधार पर उनके बारे में कोई राय बनानी चाहिए, ना कि उनके परिवार की ‘निंदा’ कर के.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘आखिर में यह आपकी इच्छा है. क्या आप मेरे परिवार की निंदा करेंगे या आप मेरी क्षमता के आधार पर मेरे बारे में कोई राय बनाएंगे… यह आपकी पसंद है. यह आप पर निर्भर करता है, मुझ पर नहीं.’

पीटीआई भाषा की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ब्रिटेन यात्रा पर गए राहुल गांधी ने कहा कि ‘मेरे पिता के प्रधानमंत्री बनने के बाद से मेरा परिवार सत्ता में नहीं रहा. यह चीज भूली जा रही है।”

राहुल ने कहा, “दूसरी बात, ‘हां, मैं एक परिवार में पैदा हुआ हूं… मैं जो कह रहा हूं उसे सुनें, मुद्दों के बारे में मुझसे बात करें, विदेश नीति, अर्थशास्त्र, भारतीय विकास, कृषि पर, खुलेआम और स्वतंत्र रूप से मुझसे बात करें. मुझसे जो भी प्रश्न पूछना चाहते हैं, वह पूछें और फिर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मैं क्या हूं।”