बुखार से १२० बच्चे मरने और रोग फैलने के १८ दिन बाद मुजफ्फरपुर पहुंचे सीएम नीतीश कुमार

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सुशासन बाबू के नाम से जाने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार फैलने के १८ दिन और १२० बच्चों की जान चली जाने के बाद मंगलवार को अस्पताल का दौरा करने पहुंचे। गुस्साए लोगों ने उनके खिलाफ जमकर नारे लगाए उनके ‘वापस जाओ” के नारे लगाए।
मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (एक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम) से १२० से ज्यादा बच्चों की जान अब तक जा चुकी है। बीमारी के नियंत्रण से बाहर दिख रही स्थिति के १८ दिन बाद सीएम नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर पहुंचे तो लोगों के उनके विरोधी नारों ने उनका स्वागत किया। नीतीश वापस जाओ के नारे भी लगे। बच्चों की मौत से दुखी परिजनों के पास और कोइ विरोध उपाए था भी नहीं क्योंकि सरकार अभी तक इस रोग पर लगाम के लिए कुछ नहीं कर पाई है।
परिजनों का आरोप है – ”इलाज नहीं हो रहा है। रोज बच्चे मर रहे हैं। सीएम आज जागे हैं, उन्हें वापस चले जाना चाहिए।” परिजन ही नहीं विपक्षी भी सुशासन बाबू को कोस रहे हैं। आज नीतीश कुमार के दौरे के चलते अस्पताल में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई थी। ऐसे में मरीजों और उनके परिवारों को और अधिक मुसीबतों का सामना कर पड़ा।
मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत पूरे देश में मीडिया की हेडलाईन बनी हुई है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार और पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए इसे ”मासूमों की हत्या” करार दिया है। राबड़ी ने ट्वीट कर कहा – ”एनडीए सरकार की घोर लापरवाही, कुव्यवस्था, सीएम का महामारी को लेकर अनुत्तरदायी, असंवेदनशील और अमानवीय अप्रोच। लचर और भ्रष्ट व्यवस्था, स्वास्थ्य मंत्री के गैर-जिम्‍मेदाराना व्यवहार और भ्रष्ट आचरण के कारण गरीबों के १००० से ज्‍यादा मासूम बच्चों की चमकी बुखार के बहाने हत्या की गई है।”
अस्पताल में बच्चे बिस्तरों पर तड़प रहे हैं। डाक्टर बीमारी के लिए कोइ न कोइ बहाना बता रहे हैं। मसलन लोगों का साफ़ नहीं रहना, कुपोषण, लीची खाना आदि-आदि। इस बीमारी से बच्चे मरने से कैसे रुकेंगे यह अभी तक किसी चिकित्सक के मुंह से नहीं सुना गया है गया है।