‘बचाव की गुहार लगाने वाले भी आपकी प्रजा है महाराज’

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महाराज, आपने मदद की जो चीख-पुकार सुनी वह उन करोड़ों बेरोज़गार युवाओं, दुख-तकलीफ झेल रहे किसानों, सताए जा रहे दलितों-आदिवासियों, सजा भुगत रहे अल्पसंख्यकों, बर्बाद हो गए छोटे-मझोले व्यवसाइयों की थी जो अब आज़ादी चाहते हंै। आपके अत्याचारी कुशासन से’।

तकरीबन 100 दिन में ये आज़ाद हो भी जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का ट्वीट।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुई परेड ग्राउंड में 19 जनवरी को हुई महा-रैली में हुए विपक्ष के महागठबंधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और नकारात्मकता का ऐसा गठबंधन बताया है जिसके खिलाफ जहां जुटे लोग बचाव-बचाव-बचाव की गुहार लगा रहे थे। उनकी इस टिप्पणी पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया जिसमें कि मदद की गुहार लगाने वाले बेरोजगार युवा, छोटे व्यवसाई और दलित-आदिवासी और किसान थे।

उधर भाजपा बंगलुरू में जद-कांग्रेस की सरकार गिराने पर जुटी। भाजपा के गुरूग्राम (गुडग़ांव) में अपने विधायकों को संरक्षण देने के बाद पूरे कर्नाटक और देश में पार्टी की सत्ता संभालने की जल्दी पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। बंगलुरू के पास ही एक रिसोर्ट इगेल्टन में कांग्रेस के दो विधायकों में किसी बात पर हुई मारपीट में घायल विधायक आनंद सिंह अस्पताल में और आक्रामक कांगे्रसी विधायक गणेश को कांग्रेस ने फिलहाल पार्टी से मुअत्तल का दिया है। इस मुद्दे को भी भाजपा ने राजनीतिक रंग देने और कांग्रेस के अंदर की मारपीट को मुद्दा बनाने की कोशिश की। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। ज़्यादातर लोग इसे भाजपा की बदहवासी ही मान रहे हैं।

उधर राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री को ट्वीट से उत्साहित कांग्रेसी नेताओं -कार्यकर्ताओं में उत्साह का नया दौर संचारित हुआ है। कांग्रेस ने राफेल जेट विमान सौदे में हुए गोलमाल के मुद्दे को और धार दी। उन्होंने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण पर आरोप लगाया कि उनकी टिप्पण्ी से साफ जाहिर होता है कि वे राष्ट्रहित की बजाए व्यापारिक हितों को ज़्यादा तरजीह देती हैं। कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, कांग्रेस हमेशा कहती रही है कि 30 हजार करोड़ का ठेका और लाइफ साइकिल कॉस्ट का एक लाख करोड़ का ठेका मोदी ने अपने दोस्त को दे दिया।

रक्षामंत्री से चतुर्वेदी ने जानना चाहा कि आखिकर ऐसी कौन सी अनिवार्यता थी कि राफेल की मरम्मत-देखभाल और नव निर्माण का काम एचएएल की बजाए निजी कंपनी को दे दिया गया। जबकि रुपए 36000 करोड़ मात्र के मसविदे पर 13 मार्च 2014 को ही आम सहमति हो गई थी। सरकार को इसका स्पष्टीकरण देनाा चाहिए। साथ ही यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 108 लड़ाकू विमान खरीदने की बात की थी उसे किस आधार पर रद्द किया गया।