बँटे हुए जनादेश में ‘आप’ का कमाल

पहली बार चंडीगढ़ नगर निगम का चुनाव लड़कर 15 साल से क़ाबिज़ भाजपा को हराया

आम आदमी पार्टी (आप) के झाड़ू ने सिटी ब्यूटीफुल की राजनीति में धमाल मचाते हुए चंडीगढ़ नगर चुनाव में दिग्गज पार्टियों- भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल की सफाई कर दी। दिलचस्प यह कि आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में पहली बार ही उतरी थी; लेकिन उसके प्रत्याशियों ने 14 वार्डों में जीतकर सबको हैरान कर दिया। चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी है, जहाँ अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में यह कयास लग रहे हैं कि क्या पंजाब के चुनावों पर भी इन नतीजों का कोई असर पड़ेगा? आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने नतीजों के बाद यह कहने में बिल्कुल देरी नहीं की कि चंडीगढ़ के नतीजे पंजाब के भावी नतीजों की झलक देते हैं।

नतीजों को देखें, तो निगम में बँटा हुआ जनादेश आया है, जिसमें किसी को बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस का रोल बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है, जिसे कुल मिलकर सबसे ज़्यादा वोट मिले हैं। इन नतीजों से यह भी ज़ाहिर होता है कि आम आदमी पार्टी ने जो सीटें जीतीं, उसमें उसने भाजपा के वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगायी। कांग्रेस अपना वोट बैंक बचाने में सफल रही, भले ही वह सीटें आठ ही जीत पायी।

भाजपा को 12 सीटें मिलीं, जो कि आम आदमी पार्टी से भी दो कम हैं। भाजपा के लिए यह नतीजे बड़ा झटका हैं; क्योंकि 15 साल के बाद उसके हाथ से चंडीगढ़ नगर निगम की सत्ता छिन गयी है। बँटे हुए जनादेश में आम आदमी पार्टी भले सबसे बड़ी पार्टी है; लेकिन अभी से यह चर्चा है कि बहुमत के लिए पार्टियों में तोड़-फोड़ हो सकती है। कुल 35 सीटों में बहुमत के लिए 18 सीटों की ज़रूरत रहती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को बहुमत के लिए अभी भी चार सीटों की दरकार रहेगी।

नतीजों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि आम आदमी पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस के क़िलों में सेंध लगाकर यह 14 वार्ड जीते हैं। अकाली दल के खाते में भी एक सीट गयी है। भाजपा की हालत यह रही कि उसके वर्तमान मेयर रविकांत शर्मा तक चुनाव हार गये। उन्हें आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने ही हराया। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मेयर दवेश मौदगिल के साथ चंडीगढ़ नगर निगम के भाजपा के प्रत्याशी दो और पूर्व मेयर भी हार गये।