फैसले के आगे

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आयोध्या पर फैसला आ गया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का सर्वसम्मत फैसला। दशकों तक यह मुद्दा राजनीति के पालने में डोलता रहा। भाजपा इसके केंद्र में रही। भले तमाम हिन्दू संगठन, विश्व हिन्दू परिषद्, आरएसएस, शिवसेना और अन्य संगठन भी इससे शिद्दत से जुड़े रहे। लेकिन राजनीति की सबसे बड़ी खुराक तो इसे भाजपा ने ही बनाया; पिछले दो-तीन दशक में कमोवेश हर लोक सभा और उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों में भी। अब जबकि राम मंदिर निर्माण का मार्ग सर्वोच्च न्यायालय के सर्वसम्मत फैसले से प्रशस्त हो गया है, यह उचित समय है कि केंद्र में सत्तासीन भाजपा अब जनता से जुड़े गम्भीर मसलों पर ध्यान दे।

राम हिन्दुओं की आस्था के सबसे बड़े केंद्र हैं। इसलिए भी कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। उत्तर प्रदेश, जहाँ राम की नगरी अयोध्या है और जहाँ राम निवास करते हैं, उनकी मान्यताओं और आदर्शों को आत्मसात करने का यह उचित समय है। सर्वोच्च अदालत के फैसले से मानव-मान्यताएँ और विश्वास जीता है; यह फैसले के बाद तमाम समुदाओं और धर्मों के बीच सौहार्द बने रहने से साफ हो गया है। यह फैसला किसी एक की धर्म नहीं, एक विश्वास की जीत है। यह मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों की जीत है।

धर्म की अफीम खिलाकर राजनीति के खिलाड़ी सदियों से अपनी दुकान चलाते रहे हैं। इसे यदि कोई परास्त कर पाया है, तो वह और कोई नहीं, बल्कि जनता ही है। जनता खुद नफरत करना और लडऩा नहीं चाहती। परदे के पीछे ऐसा खेल खेलने वाले चेहरे दूसरे ही होते हैं। सर्वोच्च अदालत के सर्वसम्मत फैसले ने इन चेहरों को भी परास्त कर दिया है।

देश के संविधान ने यहाँ के नागरिकों को समान अधिकार दिये हैं; खाने-पीने, उठने-बैठने से लेकर धर्म का पालन करने तक। इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए; क्योंकि पूर्व के अनुभव कड़वे रहे हैं। कुछ खराब बातें भी हुई हैं। असंख्य निर्दोषों की जान भी गयी है। यह सब मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों के विपरीत है। सुख की बात है कि 9 नवंबर के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद पुराने जख्म हरे नहीं हुए। यही मानवतावाद है, यही राम की शिक्षा है। सभी धर्मों के मूल में यही है। आने वाले महीनों में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। आओ इसकी नींव में मर्यादा पुरुषोत्तम के आदर्शों का मज़बूत गारा डाल दें।

यह सही वक्त है कि मोदी सरकार अयोध्या के फैसले के बाद अब विकास, रामराज्य और पाँच ट्रिलियन डॉलर अर्थ व्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करे। ‘तहलका’ सभी समझदार आवाज़ों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सहमत है; जिन्होंने सही कहा है कि ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’ उन्होंने ट्वीट किया- ‘चाहे वह राम या रहीम की भक्ति हो, अब हर किसी के लिए समर्पण के साथ भारत को मज़बूत करने का समय है।’

अब जबकि लम्बे समय से देश में ध्रुवीकरण के सूत्रधार रहे मसले को सुलझा लिया गया है और मस्जिद और राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो गया है; राष्ट्र का ध्यान अन्य महत्त्वपूर्ण मुद्दों के विकास के लिए स्थानांतरित होना चाहिए। बेहतर कानून व्यवस्था, रोज़गार, किसान, सामाजिक और आर्थिक समृद्धि अब सूची में सबसे ऊपर होने चाहिए। शासन में तमाम भागीदारों को 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जुट जाना चाहिए। यह असली राम राज्य बनाने का वक्त है।