फीस बढ़ौतरी के खिलाफ जेएनयू छात्र सड़कों पर

पुलिस के साथ हुई झड़प, वीसी के न मिलने से हैं नाराज

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फीस बढ़ोत्तरी और ड्रेस कोड के खिलाफ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रों का आंदोलन सोमवार को तेज हो गया। बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर हैं और पुलिस से उनकी तनातनी भी देखी गयी है। आज जेएनयू में कन्वोकेशन भी थी।

छात्रों को इस बात पर गुस्सा है कि हॉस्टल की फीस ६ से ७ हजार बढ़ा दी गई है। गरीब छात्र यहां कैसे पढ़ सकेंगे।
नेल्सन मंडेला मार्ग पर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन की ‘‘छात्र-विरोधी’’ नीति के खिलाफ ही वे  विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र जब अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की तरफ बढ़ने की कोशिश में थे तो गेटों पर अवरोधक लगा दिए गए। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू उस समय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

सुबह शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के बाद परिसरों के बाहर सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है। जेएनयू परिसर के उत्तरी और पश्चिमी द्वारों के अलावा बाबा बालकनाथ मार्ग पर एआईसीटीई ऑडिटोरियम और जेएनयू के बीच स्थित सड़क पर बैरिकेड लगाये गये लेकिन छात्रों ने इन्हें तोड़ दिया। इसके बाद वे एआईसीटीई की तरफ मार्च करने लगे। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया।

छात्र हाथों में ‘‘दिल्ली पुलिस वापस जाओ’’ के नारे लिखी तख्तियां लिए दिखे। यही नहीं कुछ में कुलपति एम जगदीश कुमार को एक ‘‘चोर’’ बताया गया है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल कार्यक्रम स्थल से काफी देर तक बाहर नहीं आ पाए। पुलिस ने मंत्री को रास्ता देने का छात्रों से आग्रह किया लेकिन उन्होंने इसे नहीं माना।

प्रदर्शनकारी ”हम कुलपति से मिलना चाहते हैं’’ जैसे  रहे थे। पुलिस को छात्रों को प्रदर्शन स्थल से उठाकर बस में डालते हुए देखा गया। छात्र कुलपति से मिलना चाहते थे और उनकी मांग थी कि मसौदा छात्रावास मैनुअल को वापस लिया जाये जिसमें उनके अनुसार फीस वृद्धि, कर्फ्यू का वक्त और ड्रेस कोड जैसी छात्र विरोधी पाबंदियों हैं।

वे हॉस्टल मैनुअल, पार्थसारथी चट्टानों पर प्रवेश और छात्रसंघ कार्यालय पर ताला लगाने का विरोध कर रहे हैं। छात्रों के मुताबिक मैनुअल में शुल्क वृद्धि और ड्रेस कोड जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं। वे १५ दिन से विरोध कर रहे हैं, लेकिन कुलपति उनसे  बात करने को तैयार नहीं हैं। छात्रों के मुताबिक जेएनयू में ४० फीसदी छात्र गरीब परिवारों से आते हैं और हॉस्टल की फीस ६ से ७ हजार बढ़ाई गई है जो गरीब छात्रों पर कुठाराघात है।