फिटनेस ही सर्वोपरि, 2023 के विश्व कप से पहले खिलाडिय़ों की फिटनेस देखेगा बीसीसीआई

फिटनेस एक ऐसी आवश्यकता है, जिसके बिना स्पोट्र्स और स्पोट्र्समैन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अब इस दिशा में कुछ क़दम उठाने की तैयारी में है। दिलचस्प बात यह है कि फिटनेस को लेकर इस तरह का सुझाव स्टार क्रिकेटर विराट कोहली ने बीसीसीआई के सामने रखा था।

हालाँकि तब इस पर कुछ नहीं हुआ। अब बीसीसीआई के नये अध्यक्ष रोजर बिन्नी ने इस दिशा में काम शुरू किया है और बोर्ड की एक बैठक करके यो-यो टेस्ट के साथ डेक्सा टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। भारत के कई बड़े क्रिकेट खिलाड़ी 2022 में चोट से जूझते रहे और बीसीसीआई को अब कि फिटनेस की दिशा में कुछ बड़ा करने का समय आ गया है। बीसीसीआई की बैठक में इस मसले पर काफ़ी चर्चा हुई कि खिलाड़ी फिटनेस सर्टिफिकेट लाते हैं; लेकिन फिर भी चोटिल हो रहे हैं। ख़ुद कप्तान रोहित शर्मा ने खिलाडिय़ों के चोटिल होने का मसला उठाया था। रोहित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के कामकाज से भी असन्तुष्ट थे। मुम्बई में हुई बैठक में बोर्ड अध्यक्ष रोजर बिन्नी के अलावा सचिव जय शाह, रोहित शर्मा, हेड कोच राहुल द्रविड़, एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण और भंग चयन समिति के अध्यक्ष चेतन शर्मा उपस्थित रहे। इसमें 20 खिलाडिय़ों का एक पूल बनाकर उसमें से वन-डे विश्व कप की टीम चुनने का फ़ैसला हुआ।

इस बैठक के फ़ैसलों पर नज़र दौड़ाएँ, तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि बोर्ड खिलाडिय़ों की फिटनेस को लेकर गम्भीर है और 2023 के एक दिवसीय विश्व कप को लक्ष्य मानते हुए फिटनेस पर ख़ास काम करना चाहता है। इसमें यह भी एक बड़ा फ़ैसला हुआ है कि यदि विश्व कप से पहले खिलाड़ी की फिटनेस पर सन्देश जैसा कुछ होगा, तो उसे आईपीएल में नहीं खेलने दिया जाएगा। विदेशी क्रिकेट बोर्ड यही करते हैं। ऐसे खिलाड़ी, जो बड़े टूर्नामेंट से पहले फिटनेस के मामले में समस्या झेल रहे होते हैं; उन्हें आईपीएल में खेलने की इजाज़त नहीं मिलती।

अब एनसीए और आईपीएल के फ्रेंचाइजी मिलकर फिटनेस में संदिग्ध खिलाडिय़ों की फिटनेस लगातार मॉनिटर करेंगे। एनसीए को लगा कि खिलाड़ी के चोटिल होने का ख़तरा है, तो उसे आईपीएल में नहीं खेलने दिया जाएगा। यह सभी खिलाडिय़ों के मामले में नहीं, बल्कि पूल में चुने गये 20 खिलाडिय़ों में से ही होगा। हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि आईपीएल में तो खिलाड़ी खेल लेते हैं; लेकिन देश की टीम के लिए खेलते हुए उनकी फिटनेस या चोट आड़े आ जाती है।

रवींद्र जडेजा, जसप्रीत बुमराह जैसे बड़े खिलाड़ी इसका उदहारण हैं, जो 2022 में देश के लिए कई मैच नहीं खेल पाये। यहाँ तक कि हार्दिक पांड्या, जिन्हें अब टी-20 टीम का कप्तान बना दिया गया है, पीठ की चोट के कारण 2021 के टी20 विश्व कप में गेंदबाज़ी ही नहीं कर पाये। ज़ाहिर है बीसीसीआई अब खिलाडिय़ों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर फोकस कर रहा है।

दरअसल बीसीसीआई को विराट कोहली के दिये सुझावों पर अमल करने का आइडिया तब आया, जब उसने 2022 के टी20 विश्व कप में भारत के ख़राब प्रदर्शन पर रिव्यू मीटिंग की। बैठक में उपस्थित क्रिकेट अधिकारियों ने महसूस किया कि कोहली के सुझाव महत्त्वपूर्ण थे और उन पर अमल किया जा सकता है। इस रिव्यू मीटिंग में कोहली के वर्कलोड मैनेजमेंट पर गहन चर्चा की गयी। दरअसल कोहली ने सन् 2019 के आईपीएल से ऐन पहले बीसीसीआई को सुझाव दिया था कि 50 ओवर का विश्व कप चार साल में आता है, जबकि हम आईपीएल हर साल खेलते हैं। ऐसे में कुछ बड़े खिलाडिय़ों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।

याद रहे सन् 2019 वनडे विश्व कप, 2021 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप, 2021 टी20 विश्व कप और 2022 टी20 विश्व कप में भारत को हार झेलनी पड़ी। बहुत से विशेषज्ञ मानते हैं कि बीसीसीआई को कोहली के सुझावों को गम्भीरता से लेना चाहिए था। अब बीसीसीआई ने जो फ़ैसले किये हैं। उनके मुताबिक, 50 ओवर के विश्‍व कप के लिए 20 खिलाडिय़ों का पूल तैयार किया जाए। इनमें से खिलाडिय़ों को विश्‍व कप से पहले भारतीय टीम से खेलने का अवसर मिलेगा। जो दूसरा बड़ा फ़ैसला बीसीसीआई ने किया वह था टीम में चयन से पहले डेक्‍सा टेस्‍ट अनिवार्य करना।

इसके अलावा भारत के घरेलू क्रिकेटर्स को राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए प्रर्याप्त डॉमेस्टिक क्रिकेट खेलना होगा और आईपीएल ही राष्ट्रीय टीम में चयन का ज़रिया नहीं रहेगा। अच्छी बात यह होगी कि अगले साल के विश्व कप के लिए टीम का चयन अभी से हो जाएगा, जिससे खिलाडिय़ों को लगातार साथ खेलकर बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।

क्या है डेक्सा टेस्ट?