प्रियंका गांधी महीने में दूसरी बार आज वाराणसी जाएंगी, संत रविदास जयंती समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम

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एक महीने में दूसरी बार कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी आ रही हैं। प्रियंका सीरगोवर्धन स्थित रविदास मंदिर जाएंगी और वहां संत रविदास के दर्शन कर जयंती समारोह में शामिल होंगी।

गौरतलब है कि कांग्रेस महसचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी को यूपी का जिम्मा दिया गया था और वे इसके बाद यह पांचवां मौक़ा होगा जब वो वाराणसी आएंगी। मई, २०१९ के लोकसभा चुनाव से पहले इस चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी कि प्रियंका गांधी पीएम मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में वाराणसी से मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि, बाद में खुद प्रियंका ने कहा था कि वो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहीं।

प्रियंका गांधी के बार-बार वाराणसी आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जहां कोतुहल और उत्साह है, वहीं राजनीति के जानकार पर भी इसपर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आज प्रियंका संत रविदास के दर्शन के बाद कार्यकर्ताओं से संक्षिप्त मुलाकात कर सकती हैं। उनके दौरे का मुख्य मकसद संत रविदास की जयंती पर आयोजित समारोह में हिस्सा लेना है।

इससे पहले वे ठीक एक महीना पहले १० जनवरी को रविदास मंदिर में पूजा करने पहुंचीं थीं। उस दिन प्रियंका राजघाट स्थित संत रविदास मंदिर में दर्शन करने पहुंची थीं। वहां से नाव से वो पंचगंगा घाट स्थित श्रीमठ गई थीं। वे सीएए का विरोध करने के दौरान १९ दिसंबर को जेल गए आंदोलनकारियों से भी मिलीं थीं और जेल से बाहर आए लोगों, बीएचयू छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से श्रीमठ में ही संवाद किया था। वो श्री काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन को भी गईं थीं।

पिछले साल फरवरी में पार्टी महासचिव बनने के बाद वे २० मार्च को पहली बार वाराणसी आई और इसके बाद १६ मई और फिर १९ जुलाई को भी आईं। कार्यक्रम के मुताबिक प्रियंका गांधी दोपहर करीब १२ बजे लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सीधे सीरगोवर्धन स्थित रविदास मंदिर जाएंगी और वहां  संत रविदास के दर्शन कर उनके जयंती समारोह में हिस्सा लेंगी।

खुद प्रियंका ने एक ट्वीट में कहा है – ”संत शिरोमणि गुरु रविदास ने सामाजिक बराबरी, बंधुत्व, भाईचारे और श्रम की महत्ता का संदेश दिया। भारत में बहुत पुरानी परंपरा रही है, जो मनुष्य को मनुष्य की कोटि से देखती है, धर्म और जाति के चश्मे से नहीं, गुरु रविदास इस परंपरा के वाहक रहे हैं। आज हम सबके लिए गुरुदेव रविदास की वाणी और विचार अनुकरणीय है ताकि हम एक बेहतर समतामूलक समाज बना सकें।”