पेश है चुनावी मौसम का हाल

जुबानी पारा तेजी से चढ़ रहा है, मर्यादा का पारा उतनी ही तेजी से लुढ़क रहा है. आरोपों की आंधियां प्रचंड चल रही हैं. रुक-रुक कर नहीं लगातार. थपड़ ही थपड़, प्रहार ही प्रहार. रह-रहकर जो आचार संहिता के तंबू उखाड़े जा रही हैं. चुनाव आयोग अधिकतम और न्यूनतम वेग दर्ज करने में अपने को असमर्थ पा रहा है, क्योंकि हर क्षण आंधियों का वेग एक नया रिकार्ड बना रहा है.

जगह-जगह आश्वासनों के भारी वायुदाब देखने को मिल रहे हैं. जिसे हवाई पुल बहुत आसानी से झेल रहे हैं. कहीं-कहीं शिकायतों के निम्नवायुदाब के क्षेत्र भी हैं. जिसके चलते हवा का रुख अचानक बदल भी सकता है. इस मौसम में एक अजब ‘हवा’ की चर्चा चहुंओर हो रही है, इसके वावजूद वोटर का दम घुट-सा रहा है.

घर से बाहर निकलने वालों के लिए चेतावनी- कृपया जब तक अतिआवश्यक न हो, घर से न निकलें. अगर निकलना ही पडे़ तो मुंह और आंखों को अच्छी तरह से ढंक लें. रैलियों के रेले में खूब धूल उड़ रही है और मतदाताओं के आंखों में पड़ रही है. इसलिए आंखे मींचने से कान में तेल डालना अच्छा है. बाहर धूल फांकने से घर में पड़े रहना अच्छा है.

मौसम का पूर्वानुमान- आने वाले करीब एक माह तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा.  सोमवार से इतवार आपके सप्ताह के हर वार में उम्मीदवार होंगे. वादों के बादल आंशिकरूप से छाए रहेंगे. झूठ की उमस और बढे़गी. आरोप-प्रात्यारोपों की बौछारें और तेज हो सकती हैं. और सबसे खास बात है कि सितारे अभी कुछ दिनों तक जमीन पर नजर आएंगे. मतदाताओं की आंखों की नमी के बढ़ने के चलते उन्हें गर्मी का एहसास ज्यादा होगा. प्रचार थमने के बाद फौरी राहत मिलने के आसार हैं. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मौसम अचानक से करवट बदलेगा.  मौसम सामान्य हो जाएगा.  जो नेता आज जगराते कर रहे हैं, वे चादर तान कर सोएंगे. और जो मतदाता आज पूजे जा रहे हैं, वे करवट बदल-बदल कर रोएंगे. अगले पांच सालों के मौसम का पूर्वानुमान अभी से लगाना जितना मुश्किल है, वहीं जनता की हालत का पूर्वानुमान लगाना उतना ही आसान है. चुनावी मौसम आते हैं, चले जाते हैं, मगर देश का मौसम कमोबेश एक-सा रहता है, बदलता ही नहीं कमबख्त!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here